मदरसे से रेस्क्यू 26 बच्चों का खुलासा: डंडों-सरियों से की पिटाई, शौचालय की सफाई और लड़कियों के हंसने पर भी थी पाबंदी
बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई से दूर रखा जाता था और लड़के-लड़कियों को बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता था।
Publish Date: Sat, 24 Oct 2026 10:54:51 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Oct 2026 10:55:31 PM (IST)
मदरसे पर कार्रवाई का फाइल फोटो।HighLights
- बच्चों के बयानों में सनसनीखेज खुलासे
- मदरसे के बाहर सनातनी सेना का प्रदर्शन
- कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। झांसी रोड थाना क्षेत्र में एजी ऑफिस के पास संचालित दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने अपने बयानों में प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्चों के मुताबिक मदरसे में उन्हें सरियों और डंडों से पीटा जाता था। उनसे शौचालय की सफाई कराने के साथ परिसर में झाड़ू भी लगवाई जाती थी।
लड़कियों को हंसने तक की नहीं थी अनुमति
बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई से दूर रखा जाता था और लड़के-लड़कियों को बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता था। लड़कियों पर पाबंदियां इतनी सख्त थीं कि उन्हें हंसने तक की अनुमति नहीं थी और एक कमरे में रहने के लिए कहा जाता था।
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में शुक्रवार को मदरसे में कार्रवाई कर 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इनमें 18 लड़के और आठ लड़कियां शामिल हैं। टीम ने बच्चों को वहां से निकालकर बाल कल्याण समिति की सुपुर्दगी में दिया था।
इसके बाद कलेक्टर रुचिका चौहान और बाल कल्याण समिति के स्तर पर बच्चों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें मदरसे के भीतर कथित मारपीट, पाबंदियों और सफाई जैसे काम कराने की बातें सामने आईं।
पढ़ाई के बजाय सफाई कराने का आरोप
बच्चों के बयानों के अनुसार, उनसे शौचालय की सफाई और परिसर में झाड़ू लगाने जैसे काम कराए जाते थे। लड़कों ने भी मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें पढ़ने का अवसर नहीं दिया जाता था। इन आरोपों से बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और देखभाल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
नारेबाजी करते सनातनी सेना के नेता और कार्यकर्ता। सोशल मीडिया मदरसे पर सनातनी सेना ने किया प्रदर्शन
मदरसे से 26 बच्चों को रेस्कयू किए जाने के मामले के बाद राष्ट्रीय सनातन सेना भारत के पदाधिकारियों ने मदरसे पर प्रदर्शन किया। संगठन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि मदरसे का संचालन नियमानुसार हो रहा था या नहीं और बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जा रही थी।
राष्ट्रीय सनातन सेना भारत ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि नाबालिगों का किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी गैरकानूनी गतिविधि की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मदरसे से बच्चों को हटाने पर विधायक आरिफ मसूद ने उठाए सवाल
भोपाल मध्य के विधायक आरिफ मसूद ने दारुल कुरआन मदरसे में हुई छापामार कार्रवाई के बाद 26 बच्चों को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डा. निवेदिता शर्मा को पत्र लिखकर बच्चों को उनके माता-पिता के संरक्षण में सौंपने की मांग की है। पत्र में विधायक ने दावा किया कि बच्चों को अभिभावकों की सहमति से दीनी और बुनियादी शिक्षा के लिए मदरसे में रखा गया था। उनके अनुसार, कार्रवाई से पहले संस्थान को नोटिस देकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर नहीं दिया गया। इससे बच्चों में भय और स्वजन में चिंता पैदा हुई।
बच्चों ने मदरसे में उनको डंडों और सरियों से मारपीट किए जाने की बात कही है। बच्चियों ने बताया कि उनको कमरे के अंदर ही रहने को कहा जाता था। बाहर निकलने पर मारपीट की जाती थी। बच्चों के बयानों के आधार पर सख्त कार्रवाई होगी। - डॉ. निवेदिता शर्मा, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग