ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विज्ञान से हम भौतिक वस्तुओं का आविष्कार करते हैं, लेकिन आध्यात्म से हम स्वयं की खोज करते हैं। आध्यात्म ही वह मार्ग है, जो मनुष्य को स्वयं से परीचित कराता है। इस पूरे विश्व में हर कोई शरीर को स्वयं का मानता है, जबकि यह शरीर तो पंचभूतों से निर्मित हुआ। जबकि मनुष्य एक शुद्ध सच्चिदानंद आत्मा है। यह बात अखंड परमधाम आश्रम में मंगलवार को महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरी महाराज धर्मसभा में मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जैसे हमें कपड़े की गांठ दिखती है परंतु जिस कपड़े से गांठ बनती है वह नहीं दिखता है। ठीक उसी प्रकार हमें उस साक्षी का बोध नहीं होता है, जो अदृश्य है। भारत के सद्गंथ, सद्गुरुओं ने जो अध्यात्म का रहस्य बताया है वह विश्व के किसी भी कोने में नहीं है। यही कारण है कि आज भारत में रहने वाले मनुष्य का मन शांत रहता है, जबकि यह शांति विश्व के किसी भी अन्य देशों में नहीं है। हमें कृतज्ञ होना चाहिए उस परमात्मा का जिसने हमें आंख दी प्रभु की इस सुंदर सृष्टि को देखने के लिए, कान दिए गुरु के दिव्य वचनों को सुनने के लिए हम धन्यभागी हैं। इस अवसर गुरुपादुका का पूजन करने वालों में स्वामी लक्ष्मी नंद, पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, संरक्षक मनोहर रोहिरा, शिवलाल गांधी, अध्यक्ष धर्मवीर भिलवार, कोषाध्यक्ष हरी सिंह, समिति कार्यकारिणी सदस्य रमेशचंद राय, वीरेंद्र सिंह और रायसिंह कुशवाह आदि उपस्थित थे।
स्वभाव मेरी संपत्ति है और कर्मों ने उस पर कब्जा कर रखा हैः जीवन आपका अस्त-व्यस्त है, क्योंकि आपका अपने जीवन के प्रति शुभ भाव नहीं हैं। जिन्होंने स्वभाव की प्राप्ति कर ली वह वंदनीय हैं। जैसे-जैसे गुणों का वर्धन होता है पूज्यता बढ़ती जाती है। यह बात विनय सागर महाराज ने मंगलवार को साधनमय वर्षयोग समिति व पुलक मंच परिवार ग्वालियर की ओर से माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मुनिश्री ने कहा कि हमारे यहां परमात्मा, परमात्मा नहीं बनते, बल्कि भक्त ही परमात्मा बनते हैं। इस दृष्टि से प्रत्येक जीवात्मा परमात्मा है सभी का कर्तव्य है कि परिस्थिति अनुकूल न होने पर भी धैर्य और सभी जीवों के प्रति समता भाव रखें। राग द्वेष को कम करें। हमें यह चिंतन करना चाहिए कि स्वभाव मेरी संपत्ति है और कर्मों ने उस पर कब्जा कर रखा है हमें कर्मों से अपनी संपत्ति छुड़ाना है। वहीं मुनिश्री की कलश स्थापना 24 जुलाई को शाम सात की जाएगी। साथ ही महाराज बाड़ा से शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर मुख्य मार्गों से होती हुई माधवगंज स्थित चतुर्मास स्थल अशियाना भवन पहुचेगी। यहां आचार्य के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन, मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया जाएगा।