Matchbox became expensive in Gwalior: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। महंगाई के विरोध में पुतला दहन हेतु जिस ‘माचिस‘ का सहारा नेताओं व जनता द्वारा लिया जाता है, अब वह माचिस खुद महंगाई की आग में झुलसने वाली है। माचिस के दाम दोगुने होने वाले हैं, आगामी 1 दिसंबर से बाजार से 1 रुपये एमआरपी वाली माचिस गायब हो जाएगी। क्योंकि दिसंबर से 2 रुपये कीमत की माचिस ही मिलेगी। माचिस का उत्पादन करने वाले कारखाना संचालकों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया है। माचिस निर्माताओं का कहना है कि चूंकि चौतरफा महंगाई बढ़ रही है, ऐसे में माचिस बनाने में इस्तेमाल होने वाला रा मटेरियल (कच्चा माल) भी काफी महंगा हो गया है। 2007 में अंतिम बार माचिस के दाम 50 पैसे से बढ़ाकर एक रुपये किए गए थे, जिसके बाद से माचिस की कीमत नहीं बढ़ाई गई है। हालांकि माचिस के अंदर आने वाली स्टिक (तिली) की संख्या लगातार घटाई गई है।
वर्तमान में आधिकारिक रूप से 1 रुपये की माचिस में 40 स्टिक आती हैं, कुछ कंपनियों द्वारा 30 स्टिक भी पैक की जाती हैं। निर्णय के मुताबिक 2 रुपये की माचिस में 50 स्टिक रहा करेंगी। हालांकि बाजार में पहले से 2 व 5 रुपये दाम की माचिस उपलब्ध है, मगर इनकी बिक्री काफी कम होती है। अब जब 50 पैसे की तर्ज पर 1 रुपये की माचिस आना बंद ही हो जाएगी, तो स्वभाविक है कि सभी 2 रुपये की माचिस खरीदने के लिए विवश हो जाएंगे।
लायटर ने 90% घटाई मांग, बीड़ी-अगरबत्ती के लिए होता है इस्तेमालः माचिस कारोबारी, गोविंदराम रामचंद एंड कंपनी के संचालक भगवानदास अरोरा ने बताया माचिस की मांग बीते 10 साल में 90 फीसद घट गई है। क्योंकि अब माचिस की जगह गई स्थानों पर लाइटर ने ले लिया है। खाना पकाने के लिए परंपरागत चूल्हा अब न के बराबर ही जलता है, इंडेक्सन या गैस चूल्हे पर खाना बनता है जिसे लाइटर से जलाया जाता है। अधिक सिगरेट पीने वाले लोग भी अपने पास लायटर रखते हैं। वर्तमान में माचिस का इस्तेमाल मुख्य रूप से अगरबत्ती, धूपबत्ती व बीड़ी जलाने के लिए ही होता है। 10 साल पहले हमारी फर्म हर महीने 5 हजार बंडल (एक बंडल में 600 माचिस) बेचती थी, मगर अब केवल अब 500 बंडल ही बिक पाते हैं। चूंकि पेड़ काटने पर बंदिश व रा मटेरियल महंगा होने के कारण प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है, इसलिए माल भी कम ही आ पा रहा है। आर्डर लगे हुए रहते हैं, माल आते ही तुरंत डिलेवर कर दिया जाता है। कंपनी ने माचिस महंगी होने की आधिकारिक सूचना भेज दी है, 1 दिसंबर से माचिस 2 रुपये की ही मिलेगी।
इंटरनेट मीडिया पर आग लगा रही माचिसः कहने को माचिस बहुत छोटी सी होती है, मगर इसका इस्तेमाल हर वर्ग, हर जाति, धर्म व समुदाय का व्यक्ति करता है। यहां तक कि हिंदी सिनेमा ने फिल्म बनाकर भी ‘माचिस‘ को सम्मान दिया है। ऐसे में ‘आग लगानी लगानी माचिस‘ का महंगा हो जाना सहज ही कैसे स्वीकारा जा सकता है। यही कारण है कि भविष्य में महज 1 रुपया महंगी मिलने वाली ‘मचिस‘ से ने अभी से इंटरनेट मीडिया पर आग लगा दी है। तमाम डायलाग व दर्शन शास्त्र के वाक्य वायरस हो रहे हैं, जैसे-किसी ने बाेला माचिस है क्या? जवाब मिला, माचिस होती तो दुनिया में आग नहीं लगा देता। इतिहास गवाह है, आग लगाने वालों की कीमत कभी नहीं बढ़ती, मगर अब बढ़ गई। माचिस महंगी हो गई।