
MP Election 2023: ग्वालियर, (नईदुनिया प्रतिनिधि) मतदान के माध्यम से जनादेश ईवीएम में पहुंच गया है। ईवीएम दबे बटनों की गिनती तीन दिसंबर को होना है। जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों की ईवीएम को एमएलबी कालेज में बनाये गये स्ट्रांग रूम में केंद्रीय बल की निगरानी में रखी गई हैं। कांग्रेस प्रत्याशियों ने भी ईवीएम की निगरानी के लिए रात और दिन बगैर पलक झपकाए निगरानी के लिए अपने कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई है। कार्यकर्ता ठिठुरनभर ठंड में एमएलबी कालेज के ग्राउंड में लगे टेंट में बैठकर स्ट्रांग रूम की निगरानी कर रहे हैं। स्ट्रांग रूम तक जाने की किसी को इजाजत नहीं है। जिला प्रशासन ने स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन्ही कैमरों की स्क्रीन गाउंड में लगा रखी है। इसी स्क्रीन के माध्यम से कांग्रेस निगरानी कर रहे हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी ईवीएम की निगरानी को लेकर बेफिक्र नजर आ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशियों के प्रतिनिधि मतगणना स्थल पर नियमित रूप से आते अवश्य है।
विपक्ष को सदैव ही आशंका रहती है कि निर्वाचन आयोग की निगरानी में चुनाव कराने वाली सरकारी मशीनरी में सत्ता पक्ष के दवाब में रहती है। इसलिए विपक्ष चुनाव के दौरान अधिकारियों को चुनाव सत्तापक्ष का साथ देने का आरोप लगाते हैं। इसी आशंका को दूर करने क ेलिए स्ट्रांग रूम में रखी गई ईवीएम की टीव्ही स्क्रीन के माध्यम से निगरानी करने की सुविधा प्रत्याशियों को उपलब्ध कराई है। यह व्यवस्था जिला प्रशासन ने आरोप-प्रत्यारोपो से बचने के लिए आयोग की सलाह पर की है और राउंड क्लाक आठ-अाठ घंटे की निगरानी के लिए छह-छह कार्यकर्ताओं को रहने की इजाजत दी है।
एमएलबी कालेज में सुरक्षा के कड़े इंतजाम है। किसी आम और खास व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। केवल सीमा सुरक्षा बल के जवानों के पद चापों के बीच-बीच में कांग्रेस के ठहाके सुनाई पड़ते हैं। यह कार्यकर्ता स्कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थक स्ट्रांग रूम रखी ईवीएम की निगरानी स्क्रीन पर टकटकी बांधकर कर रहे हैं- क्रीन पर टकटकी बांधकर नजकांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थक स्ट्रांग रूम रखी ईवीएम की निगरानी स्क्रीन पर टकटकी बांधकर कर रहे हैं- र रखने के साथ आपस में हंसी मजाक भी कर लेते हैं। यह कार्यकर्ता आपस में चुनाव की गपशप कर टाइम पास करते हैं। चर्चा भी कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थक स्ट्रांग रूम रखी ईवीएम की निगरानी स्क्रीन पर टकटकी बांधकर कर रहे हैं- चुनाव की होती है। इस चर्चा में इस बार कांग्रेस की सरकार बनने की आशा झलकती नजर आती है। पिछले 20 वर्ष से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। नये कार्यकर्ताओं ने तो सत्ता का स्वाद तक नहीं चखा है। कोई कहता है कि बस सरकार बन जाए तो काम-धंधे व्यवस्थित हो जाए। कई सालों से धक्के खा रहे हैं।