
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चंबल नदी पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले अंबाह-पिनाहट और अटेर-जैतपुर पुल के निर्माण में आ रही अड़चनों को लेकर हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से राज्य सरकार को नोटिस तामील कराने के निर्देश दिए।
इसके लिए सात कार्यदिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा कर स्पीड पोस्ट के माध्यम से नोटिस भेजने को कहा गया है। यह आदेश याचिकाकर्ता की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर जारी किया गया है। नोटिस उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लोक भवन (सिविल सचिवालय), लखनऊ को भेजा जाएगा।
दरअसल, अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया की ओर से दायर जनहित याचिका में चंबल नदी पर बन रहे दोनों पुलों के निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया है। पिछली सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार ने तस्वीरों के साथ निर्माण की स्थिति स्पष्ट की थी।
सरकार ने बताया था कि अंबाह-पिनाहट पुल का मुख्य निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश की ओर पहुंच मार्ग का काम बाकी है। वहीं एटर-जैतपुर पुल के अतिरिक्त खुले हिस्से का निर्माण उत्तर प्रदेश की ओर वन विभाग और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति नहीं मिलने के कारण शुरू नहीं हो सका है।
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मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि उत्तर प्रदेश की सीमा में निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिलने से काम प्रभावित हो रहा है। इसके बाद न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी मामले में पक्षकार बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अब नोटिस जारी होने से पुल निर्माण में आ रही बाधाओं को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष भी न्यायालय के सामने आएगा।