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एमपी हाई कोर्ट ने कर्मचारी को पेंशन देने का दिया आदेश, सरकार पर लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 35 साल से अधिक समय तक तदर्थ आधार पर सेवा देने वाले प्रयोगशाला तकनीशियन को बड़ी राहत दी है।

By Priyank SharmaEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 01:38:21 AM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 01:38:21 AM (IST)
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एमपी हाई कोर्ट ने कर्मचारी को पेंशन देने का दिया आदेश, सरकार पर लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना
ग्वालियर हाई कोर्ट से कर्मचारी को राहत, सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. ग्वालियर हाई कोर्ट से कर्मचारी को राहत
  2. 35 साल की तदर्थ सेवा को माना नियमित
  3. कर्मचारी को पेंशन देने का दिया आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 35 साल से अधिक समय तक तदर्थ आधार पर सेवा देने वाले प्रयोगशाला तकनीशियन को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने उसकी सेवा 31 दिसंबर 1985 से नियमित मानते हुए पेंशन सहित सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कर्मचारी को अनावश्यक रूप से परेशान करने पर शासन पर 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति भी लगाई है।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता को चयन प्रक्रिया के बाद 31 दिसंबर 1985 को प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर तदर्थ आधार पर नियुक्त किया गया था। हालांकि नियुक्ति अस्थायी थी, लेकिन उसे शुरुआत से ही 515-10575-15-800 रुपये का नियमित वेतनमान और महंगाई भत्ता दिया गया।


सेवा के दौरान उसे क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान का लाभ भी मिला। वर्ष 2012 में पहला और दूसरा समयमान वेतनमान तथा मार्च 2025 में चौथा समयमान वेतनमान स्वीकृत किया गया। इसके बावजूद विभाग ने उसकी सेवा नियमित नहीं की।

कर्मचारी 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाला है। उसने नियमितीकरण और पेंशन लाभ की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सरकार ने तर्क दिया कि तदर्थ नियुक्ति से नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिलता। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहारावत ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी और तलसीभाई धनजीभाई पटेल प्रकरणों का उल्लेख किया।

कोर्ट ने कहा कि अवैध और अनियमित नियुक्ति में अंतर है। कर्मचारी आवश्यक योग्यता रखता था और उसे लंबे समय तक नियमित वेतनमान दिया गया। ऐसे में केवल तदर्थ नियुक्ति का हवाला देकर उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने विभाग को तीन महीने में सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं। देरी होने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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