अनुकंपा नियुक्ति पर MP हाई कोर्ट का अहम फैसला, कहा- यह विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। पात्र व्यक्ति सरकारी नीति के अनुसार ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 08:30:06 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 08:30:06 AM (IST)
अनुकंपा नियुक्ति पर MP हाई कोर्ट का अहम फैसला। (फाइल फोटो)HighLights
- हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को विरासत का अधिकार मानने से इनकार किया।
- न्यायमूर्ति अमित सेठ ने उत्तराधिकार न्यायालय का संबंधित आदेश निरस्त किया।
- मामला मृत पुलिस कर्मचारी हरिशंकर की वसीयत से जुड़ा था।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। यह संबंधित विभाग की नीति के तहत पात्रता और शर्तें पूरी करने पर ही मिल सकती है।
न्यायमूर्ति अमित सेठ ने उत्तराधिकार न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मृत पुलिस कर्मचारी हरिशंकर की मां या बहन को अनुकंपा नियुक्ति पाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई थी।
ये है पूरा मामला
- मामला हरिशंकर की 9 जुलाई 2007 की वसीयत से जुड़ा था। उनकी मृत्यु के बाद मां और बहन ने वसीयत के आधार पर प्रोबेट प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। कार्यवाही के दौरान पक्षकारों के बीच समझौता हुआ, जिसके आधार पर उत्तराधिकार न्यायालय ने 23 अप्रैल 2010 को संपत्ति संबंधी आदेश के साथ मां या बहन को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार भी दे दिया था।
राज्य ने इसी हिस्से को हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने कहा कि उत्तराधिकार न्यायालय के समक्ष प्रोबेट कार्यवाही में अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार तय नहीं किया जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति न तो विरासत है और न ही कोई ऋण या प्रतिभूति, जिसके संबंध में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किया जा सके।
कोर्ट ने आदेश के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसमें मां या बहन को नियुक्ति का अधिकार दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे संबंधित सरकारी नीति के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत कर सकती हैं।