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40 बस रूटों की नई परिवहन योजना पर MP हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई, नोटिफिकेशन पर लगाई अंतरिम रोक, राज्य सरकार से जवाब मांगा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 40 बस रूटों के लिए सरकार की नई परिवहन योजना के नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है। हितों के टकराव और कानूनी दर्जा देने के मामल...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sat, 01 Aug 2026 09:32:44 AM (IST)Updated Date: Sat, 01 Aug 2026 09:32:44 AM (IST)
40 बस रूटों की नई परिवहन योजना पर MP हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई, नोटिफिकेशन पर लगाई अंतरिम रोक, राज्य सरकार से जवाब मांगा
40 अंतरराज्यीय बस रूटों की एकाधिकार पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. MPHC ने 40 अंतरराज्यीय बस रूटों के लिए जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी
  2. निजी बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह की याचिका पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई
  3. याचिकाकर्ता ने तर्क पर इस मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से जवाब मांगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 40 अंतरराज्यीय बस रूटों पर लागू की जा रही 'विशेष परिवहन योजना' की प्रक्रिया को MP हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी 7 जुलाई 2026 के नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य शासन और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार के जवाब देने के बाद इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

यह याचिका निजी स्टेज कैरेज बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह सालों से प्रस्तावित मार्गों के हिस्सों पर बसों का संचालन कर रहा है। सरकार की नई योजना से उसके बिजनेस राइट्स का सीधा हनन हो रहा है।


याचिका में उठाए गए 2 बड़े सवाल

दायर की गई याचिका में दो बड़े सवाल उठाए गए हैं-

पहला- योजना पर मिलने वाली आपत्तियों का निपटारा परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह (IAS) को करना है। दिलचस्प बात यह है कि मनीष सिंह ही 'मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' के प्रबंध संचालक (MD), MPSRTC के MD और इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के CEO जैसे प्रमुख पदों पर काबिज हैं।

इस पर सरकार की ओर से वकील ने कहा- जिस कंपनी को फायदा पहुंचाया जा रहा है, उसके MD ही आपत्तियों पर फैसला सुनाएंगे। कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। — का सीधा उल्लंघन है। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई संभव ही नहीं है।

दूसरा- कंपनी को STU का दर्जा नहीं। याचिका में कहा गया है कि सरकार स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) और कंपनी एक्ट के तहत नई कंपनियां बनाकर बसें चलाना चाहती है। केवल कंपनी बना देने से उसे कानूनन 'स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग' (STU) का दर्जा हासिल नहीं हो जाता। इसलिए कंपनी को मोटर वाहन अधिनियम के अध्याय-6 के तहत मिलने वाले विशेष अधिकार दिए ही नहीं जा सकते।

इन गंभीर आधारों पर याचिकाकर्ता ने सरकार की पूरी अधिसूचना को गैर-कानूनी बताते हुए निरस्त करने की गुहार लगाई है। अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट ने नोटिफिकेशन पर स्टे (रोक) लगा दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

राज्य सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-99 के तहत 7 जुलाई 2026 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत 40 प्रमुख बस रूटों पर संचालन का एकाधिकार 'मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' को देने का प्रस्ताव रखा गया था। आम जनता और ऑपरेटरों से इस मामले में आपत्तियां मांगी गई थीं।