
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग के बीच बिजली कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ग्रिड संचालन को स्मार्ट बनाने की तैयारी में हैं। इस तकनीक के जरिए बिजली की मांग का पहले से अनुमान लगाया जाएगा। इससे समय पर ग्रिड का बेहतर प्रबंधन और तकनीकी खराबियों की समय रहते पहचान संभव होगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना और अघोषित कटौती की स्थिति को कम करना है।
प्रदेश में वर्ष 2018-19 के दौरान अधिकतम बिजली मांग 14,089 मेगावाट थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 18,913 मेगावाट तक पहुंच गई। वर्तमान में यह आंकड़ा करीब 20 हजार मेगावाट के आसपास है। ऊर्जा क्षेत्र के अनुमान के अनुसार वर्ष 2027-28 तक अधिकतम मांग 22 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। बढ़ती जरूरत को देखते हुए बिजली कंपनियां पारंपरिक व्यवस्था के बजाय डिजिटल तकनीकों पर फोकस कर रही हैं।
AI से लैस एससीएडीए (SCADA) प्रणाली नियंत्रण केंद्रों को ग्रिड की वास्तविक स्थिति का लगातार आकलन करने में मदद करेगी। इसके जरिए वोल्टेज नियंत्रण, मांग-आपूर्ति संतुलन, आर्थिक डिस्पैच और पीक लोड प्रबंधन जैसे निर्णय अधिक तेजी और सटीकता से लिए जा सकेंगे। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा भी ड्रोन आधारित निरीक्षण व्यवस्था को और उन्नत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। AI आधारित इमेज एनालिसिस तकनीक की मदद से ट्रांसमिशन लाइनों, टावरों और उपकरणों में संभावित खराबियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक ट्रिपिंग की घटनाओं में कमी आएगी।
प्रदेश में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। इन स्रोतों का उत्पादन मौसम पर निर्भर होने के कारण इनमें उतार-चढ़ाव बना रहता है। AI आधारित विश्लेषण प्रणाली मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का बेहतर पूर्वानुमान तैयार कर सकेगी, जिससे ग्रिड संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
| वर्ष | अधिकतम मांग |
| 2018-19 | 14,089 मेगावाट |
| 2024 | 18,913 मेगावाट |
| वर्तमान | करीब 20,000 मेगावाट |
| 2027-28 (अनुमान) | 22,000 मेगावाट |
बिजली क्षेत्र में AI, मशीन लर्निंग और स्मार्ट ग्रिड तकनीकों के उपयोग से ग्रिड प्रबंधन अधिक दक्ष होगा। इससे मांग का बेहतर पूर्वानुमान, समय पर रखरखाव और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। - शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको