
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेशभर के आरटीओ अधिकारी अब सात दिनों में यह रिपोर्ट देंगे कि उनके जिलों में स्थित ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटरों पर वाहनों की फिटनेस कितने नियम कायदों से हो रही है। पिछले तीन माह का डेटा निकालकर रिपोर्ट हर जिले में तैयार की जाएगी। प्रदेश में होने वाले हादसों में वाहनों के अनफिट मिलने की शिकायतों के बाद यह कवायद शुरू की गई है।
प्रदेश में कुल 40 ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर हैं, यहां कितने ढंग से फिटनेस हो रही है यह रिपोर्ट में सामने आएगा। हाल में ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के गेट पर ट्रक ने 16 लोगों को रौंद दिया और सभी की मौत हो गई। वहीं 42 लोग घायल हुए। इस मामले में जांच में सामने आया कि ट्रक की फिटनेस ओके थी, इसके बाद भी ब्रेक प्रेशर लीक प्राथमिक रिपोर्ट में सामने आया है। इससे फिटनेस जांच पर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा अन्य हादसों का ब्योरा भी लिया गया है।
बता दें कि पहले आरटीओ कार्यालय पर ही वाहन की फिटनेस हो जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था निजी हाथों में दे दी गई है और ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर खोले गए हैं। दलाल तंत्र को खत्म करने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभाग ने ऐसा किया है। ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में पहले शुरू किए गए। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ाई गई।
इन फिटनेस सेंटरों पर परिवहन विभाग की ओर से कोई निगरानी भी नहीं की जाती है। परिवहन विभाग पर सिर्फ सूची आती है। यही कारण है कि सेंटरों पर होने वाली प्रक्रिया का सीधे परिवहन विभाग को पता नहीं चलता है। अब नई रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर सभी आरटीओ से रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें तीन माह का डेटा भी शामिल रहेगा। वाहनों के फिट होने के बाद भी गडबड़ होने की जानकारियां मिली हैं।
-किरण शर्मा, उपायुक्त, परिवहन, मप्र