
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी साइबर ठगी के कई दिन बीत जाने के बाद भी राज्य साइबर पुलिस के हाथ खाली हैं। ग्वालियर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से हुई 21.05 करोड़ रुपये की डिजिटल डकैती में ग्वालियर और भोपाल साइबर सेल की संयुक्त टीमें जांच में जुटी हुई हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक गिरोह का एक भी आरोपित और साइबर ठगी की रकम की हेराफेरी करने वाले म्यूल खाता धारक या बिचौलिये पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका है।
अब मामले में हो रही किरकिरी और अपनी साख बचाने के लिए राज्य साइबर पुलिस ने एक नया रास्ता निकाला है। पुलिस अब विभिन्न बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) कराई गई ठगी की आंशिक राशि को फरियादी को वापस दिलाने के प्रयास में जुट गई है। इसके लिए कोर्ट में फरियादी की ओर से आवेदन लगाया गया है। कोर्ट द्वारा होल्ड राशि को वापस लौटाने के आदेश जारी किए जाएंगे।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय के पास अनजान नंबर से कॉल आया था। दिव्या सिंह नाम की महिला से बात होने लगी। क्रिप्टो में निवेश का झांसा दिया गया। उनसे 76 बैंक खातों में 126 बार में 21.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। दिसंबर से जुलाई के बीच यह पैसा ट्रांसफर किया गया।
सीए को ऑनलाइन करीब 10.25 करोड़ रुपये का मुनाफा नजर आ रहा था। जब पैसा निकालने का प्रयास किया, तब उनसे इनकम टैक्स और अलग-अलग टैक्स के नाम पर पैसा मांगा गया। तब ठगी का पता लगा और इसकी शिकायत पुलिस अधिकारियों से की। इस मामले में राज्य साइबर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई।
करीब सात माह के दौरान यह राशि ट्रांसफर की गई। इस दौरान मुख्य 76 खातों से अन्य खातों में कई बार रकम ट्रांसफर कर निकाली जा चुकी थी। जब राज्य साइबर पुलिस के पास शिकायत पहुंची तो खातों को फ्रीज कराने का प्रयास शुरू हुआ। अलग-अलग बैंक खातों में 2.40 करोड़ रुपये फ्रीज कराने में राज्य साइबर पुलिस कामयाब रही।
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फरियादी द्वारा फ्रीज की गई राशि में से करीब 65 लाख रुपये खाते में वापस मंगाने के लिए आवेदन करना है। राज्य साइबर पुलिस द्वारा जितनी राशि के लिए आवेदन कराया जा रहा है, वही फरियादी द्वारा लगाया गया है। अब शेष रकम के लिए अन्य खातों की जानकारी के साथ आवेदन लगाया जाएगा।