ई-रिक्शा के लिए बनेगी राष्ट्रीय नीति: 60 दिन में केंद्र ढांचा करेगा तैयार, मप्र 120 दिन में लागू करेगा नियम
राष्ट्रीय नीति में ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने, इनके संचालन के लिए रूट तय करने और रूट परमिट जारी करने की व्यवस्था का ढांचा तैयार किया जाएगा। इसस...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 04:59:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 05:00:22 PM (IST)
HighLights
- 60 दिनों में तैयार होगी ई-रिक्शा के लिए राष्ट्रीय नीति
- स्थानीय जरूरतों और रूट के हिसाब से मप्र करेगा बदलाव
- ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और परमिट नियमन के लिए निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ई-रिक्शा के संचालन को लेकर अब केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय होगी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने केंद्र सरकार को 60 दिन में ई-रिक्शा संचालन के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। केंद्र की नीति देशभर के आधार बनेगी, जबकि राज्य सरकारें अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव कर सकेंगी। मप्र को 10 सितंबर से 120 दिन के भीतर व्यापक नीति अधिसूचित करनी होगी।
राष्ट्रीय नीति में ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने, इनके संचालन के लिए रूट तय करने और रूट परमिट जारी करने की व्यवस्था का ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे शहरों में सड़कों की क्षमता के अनुसार ई-रिक्शा की संख्या तय करने और यातायात दबाव वाले मार्गों को व्यवस्थित करने का रास्ता खुलेगा।
केंद्र की जिम्मेदारी : देशभर के लिए बनेगा एक ढांचा
केंद्र सरकार 60 दिन में ऐसी राष्ट्रीय नीति तैयार करेगी, जिसे सभी राज्यों को भेजा जाएगा। इसमें ई-रिक्शा की संख्या, संचालन के रूट और रूट परमिट से जुड़े मूल प्रविधान तय होंगे। अभी अलग-अलग शहरों में ई-रिक्शा के संचालन को लेकर स्पष्ट और एकरूप व्यवस्था नहीं होने से यातायात प्रबंधन की समस्या सामने आती है।
मप्र की जिम्मेदारी : स्थानीय जरूरत के हिसाब से लागू होगी नीति
राष्ट्रीय नीति मिलने के बाद मप्र सरकार को प्रदेश की आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार इसमें बदलाव करने की छूट होगी। यानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों में यातायात की स्थिति के अनुसार ई-रिक्शा के रूट और संख्या के नियम अलग किए जा सकेंगे। हालांकि राज्य को 120 दिन के भीतर अपनी व्यापक नीति अधिसूचित करनी होगी।
हाई कोर्ट में उठा था 10 साल से चल रहे संचालन का मुद्दा
मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने निशा गुर्जर की जनहित याचिका का निराकरण करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि करीब 10 साल से ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्पष्ट नियम नहीं होने से जाम और यातायात अव्यवस्था बढ़ रही है। परमिट और शुल्क देकर वाहन संचालित करने वालों पर पड़ने वाले असर का मुद्दा भी उठाया गया था। केंद्र और राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी रूट और परमिट के नियमन को व्यापक समस्या माना।