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ग्वालियर: सड़कों की खराब गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, NHAI के 26 करोड़ के भुगतान पर रोक; हाईवे किनारे शराब दुकान नीति पर सरकार से मांगा जवाब

शराब दुकानों से संबंधित नीति पर भी सवाल उठाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। इस पर कोर्ट ने शासन से सात दिन में स्पष्ट जवाब मांगा है।

By Balram SoniEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 03:53:59 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 03:54:51 PM (IST)
ग्वालियर: सड़कों की खराब गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, NHAI के 26 करोड़ के भुगतान पर रोक; हाईवे किनारे शराब दुकान नीति पर सरकार से मांगा जवाब

HighLights

  1. सड़क जांच रिपोर्ट फेल, भुगतान रुका
  2. हाईवे किनारे शराब दुकान पर सख्त रवैया
  3. कोर्ट में पेश हुए डिजिटल साक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका में हाई कोर्ट खंडपीठ ने एनएचएआई द्वारा ठेकेदार को किए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी। वहीं सिकरौदा चौराहे के पास हाईवे किनारे संचालित शराब दुकान को लेकर भी गंभीर चिंता जाहिर की है।

शराब दुकानों से संबंधित नीति पर भी सवाल उठाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। इस पर कोर्ट ने शासन से सात दिन में स्पष्ट जवाब मांगा है।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

याची कैलाश चंद अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका में बेटी बचाओ चौराहा से गुढ़ा-गुढ़ी का नाका सहित विभिन्न सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे। पिछली सुनवाई में कोर्ट के निर्देश पर गठित आयोग ने सड़क के अलग-अलग हिस्सों से नमूने लेकर उनकी जांच और एनएसवी निरीक्षण कराया था। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया द्वारा एनएसवी निरीक्षण तथा सड़क के नमूनों से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जा चुकी है।


शासन से सात दिन में मांगा जवाब

इसी मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला के समक्ष सिकरौदा के पास हाईवे के समीप संचालित शराब दुकान का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने दुकान की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई और शासन से सात दिन में जवाब मांगा है। शासन की ओर से बताया गया कि शराब दुकानों के संबंध में एक नीति बनाई गई है।

इसके तहत नगर निगम सीमा में आने वाले क्षेत्र में हाईवे से 500 मीटर के दायरे में भी शराब दुकान खोले जाने की अनुमति का प्रविधान है। इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए नीति की वैधता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। कोर्ट ने जवाब मांगा है कि यदि यह प्रविधान हाईवे के आसपास शराब दुकानों को अनुमति देता है तो क्यों न इस नीति को ही निरस्त कर दिया जाए।

एनएसवी की रिपोर्ट और डिजिटल रिकार्ड भी पेश

इस मामले में आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया द्वारा 30 अगस्त को किए गए एनएसवी निरीक्षण की हार्ड कॉपी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है। इसमें एजी कार्यालय से विक्की फैक्ट्री, मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा और कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चोपाटी सहित सड़क के चिह्नित हिस्सों का निरीक्षण शामिल है। आयोग ने एक बाहरी हार्ड डिस्क और दो पेन ड्राइव भी कोर्ट में पेश कीं हैं।

आयोग के अनुसार हार्ड डिस्क में एनएसवी निरीक्षण का मूल डाटा है, जबकि पेन ड्राइव में अंतरिम और अंतिम रिपोर्ट है। एनएचएआइ द्वारा डिजिटल रिकार्ड की दो प्रतियां उपलब्ध कराई गई थीं। एक प्रति मालखाने में जमा है और दूसरी कोर्ट के समक्ष सील कर सुरक्षित रखी गई है।