नवरात्रि से पहले जम्मू-कटरा जाने वाली ट्रेनों में 'नो रूम', वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ी परेशानी
11 अक्टूबर को जम्मू जाने वाली हिमसागर एक्सप्रेस में कई श्रेणियों में नो रूम है। झेलम एक्सप्रेस के स्लीपर में 30 और थर्ड एसी में 116 यात्रियों की वेटिं...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 10:18:48 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 10:19:34 PM (IST)
HighLights
- कई ट्रेनों में नो रूम और लंबी वेटिंग
- अब केवल तत्काल टिकट का ही सहारा
- मैहर जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस भी फुल
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। वैष्णो देवी सहित हिमाचल की कांगड़ा देवी, ज्वाला देवी और नैना देवी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। इसका असर जम्मू-कटरा जाने वाली ट्रेनों की आरक्षण स्थिति पर दिखाई देने लगा है। नवरात्रि के शुरुआती दिनों में कई ट्रेनों में स्लीपर से लेकर एसी श्रेणियों तक नो रूम की स्थिति बन गई है, जबकि कुछ ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है।
11 अक्टूबर को जम्मू जाने वाली हिमसागर एक्सप्रेस में कई श्रेणियों में नो रूम है। झेलम एक्सप्रेस के स्लीपर में 30 और थर्ड एसी में 116 यात्रियों की वेटिंग है।
मालवा एक्सप्रेस में सीट नहीं
मालवा एक्सप्रेस में भी सीट उपलब्ध नहीं है। 12 अक्टूबर को अंडमान एक्सप्रेस के स्लीपर और थर्ड एसी में नो रूम है। 13 अक्टूबर को जबलपुर-कटरा एक्सप्रेस के स्लीपर में नो रूम है, जबकि थर्ड एसी में 24 और सेकंड एसी में छह की वेटिंग चल रही है।
झेलम एक्सप्रेस के स्लीपर में 18 और थर्ड एसी में आठ यात्रियों की वेटिंग है। मालवा एक्सप्रेस के स्लीपर में भी नो रूम है। 15 अक्टूबर को अंडमान एक्सप्रेस में नो रूम और झेलम एक्सप्रेस के स्लीपर में 22 यात्रियों की वेटिंग है।
सामान्य आरक्षण में सीट नहीं मिलने के बाद यात्रियों के पास अब तत्काल कोटे से टिकट लेने का विकल्प बचा है। हालांकि तत्काल में भी सीमित सीटों के कारण यात्रियों को बुकिंग खुलते ही टिकट लेने की कोशिश करनी होगी।
महाकौशल एक्सप्रेस में भी लंबी वेटिंग
नवरात्रि में मैहर स्थित मां शारदा देवी के दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके चलते मैहर जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस में भी लंबी वेटिंग चल रही है। धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए ट्रेनों में अभी से बढ़ते दबाव के कारण श्रद्धालुओं को कंफर्म बर्थ के लिए वैकल्पिक ट्रेनों और तत्काल कोटे का सहारा लेना पड़ रहा है।