जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध 50 से अधिक प्राइवेट कॉलेज दो साल में हुए बंद, कई संस्थानों ने खत्म किए कोर्स
जीवाजी विश्वविद्यालय से दो साल पहले करीब 300 प्रायवेट कॉलेज संबद्ध थे। लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या अब 250 रह गई है। 42 कॉलेजों की संबद्धता तो एक साथ खत्म की गई थी।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 11:43:07 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 01:18:48 PM (IST)
HighLights
- फर्जीवाड़े और सरकारी फंड के गबन पर गाज
- नए नियमों की सख्ती और प्रवेश में भारी कमी
- हवा-हवाई और बिना बिल्डिंग चल रहे थे संस्थान
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के संबद्ध करीब 50 निजी महाविद्यालय पिछले दो सालों में बंद हो चुके हैं। इसकी वजह नए नियम, विभिन्न अनियमितताओं को लेकर इओडब्ल्यू जैसे संगठन की जांच में आने , नियमों को ताक पर रखना, और छात्रों का प्रवेश न लेना हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में आ रहा है बदलाव
इसके साथ ही मान्यता नवीनीकरण की फीस अधिक होना और उसके मुकाबले कॉलेज में छात्र संख्या कम होने व कॉलेज संचालकों द्वारा छात्रों को पास न करा पाना भी है। इसके साथ ही कई कॉलेजों ने अपने यहां चलने वाले कोर्स व संकायों को भी बंद कर दिया है। केवल परंपरागत विषयों को ही पढ़ा रहे हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आ रहा है।
यहां बता दें कि जीवाजी विश्वविद्यालय से दो साल पहले करीब 300 प्रायवेट कॉलेज संबद्ध थे। लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या अब 250 रह गई है। 42 कॉलेजों की संबद्धता तो एक साथ खत्म की गई थी।
कागजों पर चल रहे हवा-हवाई कॉलेजों का पर्दाफाश
पिछले दिनों सामने आया कि बंद हुए कॉलेजों में से कुछ धरातल पर संचालित ही नहीं हो रहे थे, बल्कि केवल कागजों और फर्जी दस्तावेजों के दम पर चल रहे थे। मुरैना और आसपास के अंचलों में संचालित शिवशक्ति महाविद्यालय जैसे चर्चित मामलों के सामने आने के बाद यह खुलासा हुआ कि किस तरह बिना किसी बुनियादी ढांचे, भवन, प्रयोगशाला और योग्य स्टाफ के महाविद्यालयों को मान्यता दी जा रही थी। जब इन संस्थानों की पोल खुली, जिसके परिणामस्वरूप इन्हें बंद करने की कार्रवाई की गई।
छात्रवृत्ति और सरकारी फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी
विश्वविद्यालय सूत्रों और जांच एजेंसियों के अनुसार इन बंद हुए कॉलेजों का मुख्य उद्देश्य केवल शासकीय योजनाओं का लाभ उठाना था। इन संस्थानों द्वारा बिना कक्षाएं लगाए फर्जी विद्यार्थियों के प्रवेश दिखाए जाते थे और इसके आधार पर भारी-भरकम छात्रवृत्ति तथा सरकारी अनुदानों का गबन किया जाता था। भौतिक सत्यापन के दौरान जब इन महाविद्यालयों में छात्र और सुविधाएं नदारद पाई गईं, तो संबद्धता समाप्त कर दी गई।
विश्वविद्यालय और विनियामक मानकों की अनदेखी
यूजीसी, उच्च शिक्षा विभाग और संबद्ध विनियामक निकायों द्वारा निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों पर भी गाज गिरी है। ऑल इंडिया सर्वे आन हायर एजुकेशन पोर्टल पर सही आंकड़े समय पर अपडेट न करने और निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पर शिकंजा कसा।
इसलिए बंद हो रहे और कोर्स बंद किए कालेजों ने
ग्वालियर चंबल में दो साल पहले निजी कॉलेज अपने यहां छात्रों को पास कराने की गारंटी के साथ प्रवेश देते थे। लेकिन सख्ती बढ़ने व परीक्षा केंद्रों के बदलने की वजह से कालेज संचालक अपनी गारंटी को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में छात्रों ने कॉलेजों में प्रवेश लेना बंद कर दिया, बल्कि ऐसे कालेजों को चुनना शुरू कर दिया जिनमें पढ़ाई होती है। इस वजह से न केवल कालेज बंद हुए, बल्कि वर्तमान में सौ से अधिक कॉलेजों ने अपने यहां चल रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों को भी बंद कर दिया।
पिछले दो साल में जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 50 कालेज बंद हुए हैं। इनमें कई मान्यता के नियमों व शर्तों का पालन न करने की वजह से बंद हुए हैं। कुछ के छात्रों के प्रवेश न लेने की वजह से। कई कॉलेजों ने अपने यहां चल रहे पाठ्यक्रमों को भी बंद कर दिया है। अब कॉलेजों को मान्यता देने के बाद नियमों व शर्तों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। - प्रो. शांतिदेव सिसोदिया, निदेशक, महाविद्यालय विकास परिषद, जीवाजी विश्वविद्यालय