जेएएच अस्पताल में बदहाल हुई मरीज परिवहन व्यवस्था, गंभीर मरीजों को नहीं मिल पा रही एंबुलेंस
हालात यह हैं कि न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में भर्ती गंभीर मरीजों को भी जरूरत के समय एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 01:00:52 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 01:52:10 PM (IST)
टमटम और निजी कार से मरीज को जांच कराने लाते परिजन। नईदुनियाHighLights
- महज दो पुरानी एंबुलेंस का सहारा
- निजी वाहनों से जांच कराने की मजबूरी
- मंत्रियों के निर्देश भी साबित बेअसर
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जयाआरोग्य अस्पताल (जेएएच) में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं। एमआरआई और सीटी स्कैन जांच शुरू करने की तैयारी है, लेकिन मरीजों को इन जांच केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने वाली बुनियादी व्यवस्था ही बदहाल है। अस्पताल में पेशेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (मरीज परिवहन व्यवस्था) के नाम पर महज दो पुरानी एंबुलेंस हैं।
हालात यह हैं कि न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में भर्ती गंभीर मरीजों को भी जरूरत के समय एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में स्वजन उन्हें निजी वाहन या निजी एंबुलेंस से जांच कराने ले जा रहे हैं।
अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर हो रहे हैं सवाल खड़े
यह व्यवस्था केवल मरीजों की परेशानी नहीं बढ़ा रही, बल्कि अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के मरीजों को कई बार तत्काल सीटी स्कैन या दूसरी जांचों की जरूरत होती है। ऐसे में मरीज को समय पर जांच केंद्र तक पहुंचाना उपचार का अहम हिस्सा है। इसके बावजूद गजराराजा मेडिकल कालेज प्रबंधन मरीजों की सुरक्षित शिफ्टिंग के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
एंबुलेंस का इंतजार, मजबूरी में निजी वाहन का सहारा
पुराने जेएएच परिसर स्थित सीटी स्कैन सेंटर पर जांच कराने पहुंचे श्योपुर के मरीज मोनू के स्वजन ने बताया कि अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली तो उन्हें निजी वाहन से मरीज को जांच के लिए लाना पड़ा। इसी तरह दूसरे मरीजों के स्वजन भी निजी वाहनों और निजी एंबुलेंस का सहारा ले रहे हैं। गंभीर मरीजों को इस तरह ले जाने में जोखिम रहता है। कई मरीजों को रास्ते में आक्सीजन, निगरानी और विशेष चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है। निजी वाहन में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
मंत्री के निर्देश भी बेअसर
पेशेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के निर्देश स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन को दे चुके हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका है। सवाल यह है कि दो पुरानी एंबुलेंस के भरोसे इतने बड़े अस्पताल में मरीजों की शिफ्टिंग कैसे हो रही है, यदि एक एंबुलेंस किसी मरीज को लेकर जांच केंद्र गई है और दूसरी पहले से व्यस्त है तो आपात स्थिति में मरीजों को कौन पहुंचाएगा।
पेशेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम व्यवस्था प्रभावी है, इसके बाद भी अगर मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल पा रही हैं तो इसे दिखवाया जाएगा और संबंधित को निर्देशित किया जाएगा कि एंबुलेंस समय पर मरीजों को उपलब्ध हों। - डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जेएएच