यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Police commissioner system: ग्वालियर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली, जानिए...कितनी बदल जाएगी आपके शहर की पुलिस
Police commissioner system: प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर में ही अभी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने घोषणा ...और पढ़ें
By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Tue, 19 Dec 2023 11:02:57 AM (IST)Updated Date: Tue, 19 Dec 2023 11:02:57 AM (IST)

Police commissioner system: अमित मिश्रा, ग्वालियर। प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर में ही अभी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने घोषणा की है- ग्वालियर और जबलपुर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो जाएगी। घोषणा पत्र में भी ग्वालियर, जबलपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने का दावा था। अब मुख्यमंत्री ने भी इसकी घोषणा कर दी है तो पुलिस महकमे से लेकर कारोबारी और आम लोगों के बीच कमिश्नर प्रणाली को लेकर चर्चा हो रही है। ग्वालियर में कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही कितनी बदल जाएगी आपके शहर की पुलिस जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
जरूरत क्यों: शहरों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। भौगोलिक और आबादी की दृष्टि से महानगरों का विस्तार हो रहा है। इसलिए कानून व्यवस्था की कुछ नई समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसके समाधान और अपराधियों पर नियंत्रण के लिए दो बड़े महानगरों भोपाल और राजधानी में कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी।
इंदौर और भोपाल में कब हुई थी लागू: 21 नवंबर 2021
भोपाल-इंदौर में यह है कमिश्नर प्रणाली माडल:
पद- कितने पद- रैंक
पुलिस आयुक्त- 1- एडीजी/आइजी
असिस्टेंट पुलिस आयुक्त- 2- डीआइजी
पुलिस उपायुक्त- 8- एसपी
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त- 10- एएसपी
सहायक पुलिस आयुक्त-33- डीएसपी
- भोपाल ग्रामीण, इंदौर देहात के थानों के लिए अतिरिक्त एसपी
कमिश्नर प्रणाली...पुलिस को यह अधिकार मिल जाएंगे
- - अभी जिले में धारा 144 लागू करने के लिए कलेक्टर आदेश करते हैं, पुलिस इसके लिए जब अनुशंसा करती है तब कलेक्टर आदेश करते हैं, लेकिन धारा कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद यह अधिकार पुलिस आयुक्त के पास होंगे। शहर की कानून-व्यवस्था को देखते हुए वह यह निर्णय खुद कर सकेंगे।
- - पुलिस को 107, 116, जिलाबदर, रासुका की कार्रवाई करने का अधिकार खुद ही होगा। पुलिस आयुक्त इसके आदेश कर सकेंगे। अभी पुलिस अनुशंसा करती है, फाइनर बाउंड ओवर, जिलाबदर, रासुका की कार्रवाई कलेक्टर ही करते हैं। पुलिस अधिकारी बताते हैं- कई बार कलेक्ट्रेट जाना होता है, महीनों प्रतिवेदन लंबित रहते हैं। अपराधी को इसका लाभ मिल जाता है। प्रक्रिया लंबी होने की वजह से यह स्थिति बनती है। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद यह अधिकार पुलिस को रहेंगे।
- धरना प्रदर्शन, रैली की अनुमति पुलिस ही जारी कर सकेगी। अभी कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम इसे जारी करते हैं।
- किसी भी जूलुस, रैली, सभा के दौरान किसी तरह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावना होने पर अनुमति निरस्त करने से लेकर रूट बदलने तक का अधिकार पुलिस को होगा। हथियार लाइसेंस पुलिस के अधिकार में नहीं
- - जानकारों का कहना है- इंदौर और भोपाल वाला कमिश्नर माडल ही ग्वालियर, जबलपुर में लागू होगा। इंदौर और भोपाल में हथियार लाइसेंस जारी करने का अधिकार पुलिस को नहीं मिला है, यहां भी यही होगा। मुंबई में तो हथियार लाइसेंस ही नहीं बार लाइसेंस तक पुलिस ही जारी करती है, लेकिन मध्यप्रदेश में अभी यह अधिकार पुलिस को नहीं मिला है।
सबसे बड़ा फायदा...मानीटरिंग मजबूत हो जाएगी, अफसर बोले- अपराध नियंत्रण भी होगा
- - कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही सबसे बड़ा फायदा होता है, कमिश्नरी में बल संख्या बढ़ जाती है। अभी इंदौर, भोपाल में दूसरे जिलों से तीन-तीन माह के लिए फोर्स भेजा जाता है। ग्वालियर से भी यहां फोर्स जाता है।
- - कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही मानीटरिंग मजबूत होगी, क्योंकि सुपरविजन अफसर बढ़ जाएंगे। अभी जिले में एक एसपी है, अगर कोई बड़ी घटना हो या किसी व्हीआइपी के आने पर प्रोटोकाल में जाना हो, एसपी को ही जाना होता है। यह समस्या कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद नहीं होगी।
- - शहर सब डिवीजन की जगह जोन में बंट जाएगा। थानों की निगरानी के लिए सहायक पुलिस आयुक्त, फिर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और डीसीपी रहेंगे। इनसे ऊपर असिस्टेंट पुलिस आयुक्त, आयुक्त रहेंगे। अभी स्थिति यह है- एक सीएसपी पर दो-दो सबडिवीजन का चार्ज है। पुलिस लाइन, हेडक्वार्टर, क्राइम भी इन्हें ही देखना होता है।
- जब मानीटरिंग मजबूत होगी तो अपराध नियंत्रण होगा, थानों में जिस तरह बगैर सुने ही फरियादियों को लौटा दिया जाता है, मानीटरिंग होने से यह सुधार आएगा। अब जानिए...ग्वालियर में क्या होगा कमिश्नर प्रणाली माडल
- - ग्वालियर के तत्कालीन एसएसपी अमित सांघी से कमिश्नर प्रणाली को लेकर प्रस्ताव मांगा गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ही इसका प्रस्ताव तैयार करवाया था। उस समय पूरा विश्लेषण कर शहर को दो जोन में बांटने का प्रस्ताव दिया था।
- आयुक्त- 1- एडीजी/आइजी रैंक
- एसीपी- 2- डीआइजी रैंक
- पुलिस उपायुक्त- 4- एसपी रैंक
- अतिरिक्त पुलिस आयुक्त- 6- एएसपी रैंक
इंदौर और भोपाल...जानकार बोले- अपराध कम नहीं हुआ
पुलिस महकमे के जानकारों का कहना है- पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद इंदौर, भोपाल में अपराध कम नहीं हुआ। यहां मानीटरिंग करने वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ गई, थाने कम हो गए।