शीतला माता मंदिर सड़क हादसा मामले में हाईकोर्ट सख्त: मुख्य सचिव, डीजीपी सहित 10 अधिकारियों को नोटिस जारी
अधिवक्ता विभोर कुमार साहू द्वारा दायर इस याचिका में हादसे के लिए जिम्मेदार व्यवस्थागत खामियों को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 09:43:16 AM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 09:43:39 AM (IST)
हादसे का फाइल फोटो।HighLights
- प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जनहित याचिका दायर
- यातायात और सुरक्षा व्यवस्थाओं में भारी चूक का आरोप
- मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शीतला माता मंदिर में हाल ही में हुए सड़क हादसे को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में प्रशासनिक लापरवाही लेकर याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता विभोर कुमार साहू द्वारा दायर इस याचिका में हादसे के लिए जिम्मेदार व्यवस्थागत खामियों को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
मामले की अगली सुनवाई अगले महीने
मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ग्वालियर के अध्यक्ष/कलेक्टर, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर ग्वालियर, एसपी ग्वालियर और आरटीओ ग्वालियर को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
याचिका में आरोप-यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद प्रशासन ने यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए थे। जिस मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी, वहां ट्रक के प्रवेश और आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं होने को प्रशासनिक विफलता बताया गया है। इस हादसे में 16 लोगों की जान चली गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से पर्याप्त सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए थी।
रतनगढ़ हादसे जैसी घटनाओं का भी उल्लेख
याचिका में पूर्व में हुई रतनगढ़ हादसे जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों में कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से फिलहाल नोटिस जारी किए गए हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार इससे पहले हुई कार्रवाई के दौरान ट्रक को प्रतिबंधित या संवेदनशील मार्ग से गुजरने देने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया था।