
Ram Vivah Mahotswa: ग्वालियर. (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राममंदिर में प्रभू श्रीराम व माता जानकी का विवाहोत्सव हर्षोल्लस व सनातक धर्म के रीति-रिवाजों के साथ मनाया जायेगा। ग्वालियर वालान अग्रवाल पंचायत के सचिव गोविंद बंसल ने बताया कि राममंदिर को 28 नवंबर को राममंदिर को जनकपुरी की तरह सजाया जायेगा। विवाहोत्सव की तैयारियां शुरु हो गईं हैं। राम बारात सोमवार को महाराज बाड़े पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर से दोपहर दो बजे से प्रारंभ होकर सराफा बाजार होते हुये शाम पांच बजे तक राममंदिर पहुंचेगी। जहां द्वाराचार की रस्म होगी। बारातियों का स्वागत इत्रपान से किया जायेगा। इसके बाद जनकपुरी में विवाह की सभी रस्में पूरीं की जायेंगींं। दशरथ की भूमिका में लक्ष्मणदास सिंघल, व ओमप्रकाश गुप्ता होंगे। व जनकस्वरूप रमाकांत सिंघल होगा। विवाह पंचमी पर मुख्य आयोजन राममंदिर में होगा। श्रीबृजधाम से पधार रहीं सरस्वती पूर्णिमा जी विवाह उत्सव पर दो दिवसीय प्रवचन 27 नवंबर से दोपहर 11 बजे से होंगे।
माताजानकी व श्रीराम का विवाहोत्सव मनाया जाता है
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का दिन बहुत महत्वपूर्णा माना जाता है लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शादी-ब्याह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। कहते हैं विवाह उपरांत सीता को कई कष्ट झेलने पड़े थे। इन्ही में एक था वनवास, जिसमें रावण ने सीता का हरण कर लिया था। इस दिन को लोग श्रीराम और माता सीता की विवाहोत्सव मनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन लोग अपने घरों में माता सीता और प्रभु राम का विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं।भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। इस मौके पर राम मंदिर फलका बाजार में धूमधाम देखने को मिलेगी।. घरों में भी लोग रामजी और माता सीता की पूजा करते हैं ।
विवाह पंचमी पर कुंवारी कन्याए करती है पूजा
इस दिन कुंवारी कन्या द्वारा पूजा-पाठ करना बहुत शुभ होता है। उन्हें उत्तम वर की प्राप्ति होती है। यदि शादी-विवाह में किसी प्रकार की अड़चनें आ रही हैं या किसी कारण देरी हो रही है तो विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा जरूर करें. इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं. वहीं शादीशुदा जोड़ा विवाह पंचमी के दिन व्रत-पूजन करता है तो उनके वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी नहीं होती।