नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दीवाली पर अपनों के बीच पहुंचने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता यात्रा की हो गई है। लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण की स्थिति ऐसी है कि एसी और स्लीपर दोनों श्रेणियों में जगह मिलना मुश्किल हो रहा है। जिन यात्रियों की पहली पसंद एसी कोच हुआ करती थी, वे इस बार सीट पाने के लिए स्लीपर श्रेणी में भी आरक्षण कराने को तैयार हैं। इसके बावजूद कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं।
स्पेशल ट्रेनों के बावजूद नियमित ट्रेनों में सीटें पड़ रही हैं कम
त्योहार के कारण दूसरे शहरों में काम करने वाले लोगों और विद्यार्थियों की घर वापसी का सिलसिला तेज हो गया है। जिन यात्रियों ने आरक्षण खुलते ही टिकट करा लिए थे, उनका सफर तो सुनिश्चित हो गया, लेकिन बाद में यात्रा की योजना बनाने वालों को लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, फिर भी नियमित ट्रेनों में यात्रियों की मांग के मुकाबले सीटें कम पड़ रही हैं।
ऐसे में लोग सुविधा और बजट दोनों से समझौता कर रहे हैं। तत्काल टिकट हासिल करने के लिए भी मारामारी है। कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्री बसों और निजी ट्रेवल्स की ओर रुख कर रहे हैं।
बेंगलुरु से दिल्ली तक आरक्षण के लिए मशक्कत
पांच नवंबर को बेंगलुरु जाने वाली कर्नाटक एक्सप्रेस में नो रूम की स्थिति है। यशवंतपुर संपर्क क्रांति के स्लीपर और तृतीय वातानुकूलित श्रेणी में भी जगह उपलब्ध नहीं है।
भोपाल जाने के लिए केरला एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, कर्नाटक एक्सप्रेस, तमिलनाडु एक्सप्रेस और मालवा एक्सप्रेस में भी आरक्षण नहीं मिल रहा है। नई दिल्ली जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी कम नहीं हैं।
गोवा एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस, एपी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, तमिलनाडु एक्सप्रेस, गीता जयंती एक्सप्रेस और तेलंगाना एक्सप्रेस में 5 नवंबर के लिए टिकटों की उपलब्धता यात्रियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
तत्काल में भी सीमित उम्मीद
कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर तत्काल आरक्षण यात्रियों का अगला विकल्प बनता है, लेकिन इसमें भी सीट हासिल करना आसान नहीं है। आनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए एक जुलाई 2025 से आधार प्रमाणीकरण और 15 जुलाई से आधार आधारित ओटीपी की व्यवस्था लागू है।
अधिकृत एजेंटों को एसी और गैर-एसी श्रेणियों में बुकिंग शुरू होने के पहले 30 मिनट तक टिकट बुक करने की अनुमति नहीं है।
ऐसे में यात्रियों को निर्धारित समय पर स्वयं टिकट बुक करने का प्रयास करना पड़ रहा है। तत्काल में भी सफलता नहीं मिलने पर सामान्य कोच या सड़क मार्ग से सफर करना मजबूरी बन रहा है।