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ग्वालियर में सड़कें होंगी गड्ढा मुक्त, हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती, NHAI ने सौंपी NSV सर्वे रिपोर्ट

ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता और गड्ढों की मरम्मत को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

By Vikram Singh TomarEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 08:13:31 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 08:13:31 AM (IST)
ग्वालियर में सड़कें होंगी गड्ढा मुक्त, हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती, NHAI ने सौंपी NSV सर्वे रिपोर्ट
ग्वालियर सड़क गुणवत्ता मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई (AI Generated Image)

HighLights

  1. नगर निगम ने बताया पेचवर्क का ब्योरा
  2. अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी
  3. शराब दुकानों की दूरी पर सरकार से जवाब

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की सड़कों की गुणवत्ता और गड्ढों की मरम्मत के मामले में शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने पिछली सुनवाई पर दिए गए निर्देश का पालन करते हुए NSV से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। वहीं नगर निगम ग्वालियर ने भी अपनी तरफ से सड़कों पर किए गए पेचवर्क की जानकारी न्यायालय के सामने रखी।

NHAI ने पेश की NSV सर्वे रिपोर्ट

पिछली सुनवाई में NHAI की सड़क के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर उसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने का मुद्दा उठा था। इस पर न्यायालय ने प्राधिकरण से पिछले सर्वे की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था, ताकि सड़क की मौजूदा स्थिति और निर्धारित मानकों के पालन का आकलन किया जा सके। शुक्रवार को NHAI ने इसी निर्देश के पालन में NSV सर्वे की रिपोर्ट पेश की। कोर्ट अब इस रिपोर्ट के आधार पर सड़क की गुणवत्ता का आकलन करेगा।


नगर निगम ने दिया पेचवर्क का ब्योरा, अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को

न्यायालय ने नगर निगम को भी निर्देश दिए थे कि वह सड़कों पर भरे गए गड्ढों और पेचवर्क का पूरा ब्योरा पेश करे। साथ ही मरम्मत कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और माप संबंधी निर्देश भी दिए गए थे। शुक्रवार को निगम ने पेचवर्क से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी। दोनों रिपोर्ट आने के बाद हाई कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर को निर्धारित किया है। अगली सुनवाई में इन रिपोर्टों के आधार पर सड़क की गुणवत्ता और मरम्मत कार्य से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

शराब दुकानों की दूरी पर सरकार से जवाब तलब

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के नजदीक शराब दुकानों की स्थिति से जुड़े एक अन्य मामले में भी हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायालय ने मध्य प्रदेश आबकारी नियमों के उस प्रावधान पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत नगरीय निकायों की सीमा में स्थित शराब दुकानों को राजमार्ग से 500 मीटर की अनिवार्य दूरी के नियम से छूट मिलती है, जबकि नगरीय सीमा के बाहर यह दूरी बनाए रखना जरूरी है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से इस अंतर का तार्किक आधार बताने को कहा है। साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट करना है कि राजमार्गों से शराब दुकानों की दूरी निर्धारित करने का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में लागू क्यों नहीं होना चाहिए। इस मामले में जवाब पेश करने के लिए राज्य सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया गया है।