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हाईकोर्ट सख्त: ग्वालियर बायपास के 36 किमी हिस्से में रफनेस ज्यादा, 11 किमी में गड्ढे; ठेकेदार के 26.53 करोड़ रुपये रोक

एनएचएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुबंध के अनुसार सड़क की रफनेस प्रति किलोमीटर 2500 मिमी से कम होनी चाहिए, लेकिन बायपास के 36 किलोमीटर से अधिक हिस्से मे...और पढ़ें

By Balram SoniEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 04:23:16 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 04:24:27 PM (IST)
हाईकोर्ट सख्त: ग्वालियर बायपास के 36 किमी हिस्से में रफनेस ज्यादा, 11 किमी में गड्ढे; ठेकेदार के 26.53 करोड़ रुपये रोक
झांसी रोड बस स्टैंड के सामने रोड धंसकने से गड्ढे में कार फंस गई। फाइल फोटो

HighLights

  1. एनएसवी रिपोर्ट में सड़क की पोल खुली
  2. ठेकेदार की एन्युइटी राशि एफडी में जमा
  3. निगम ने 461 स्थानों पर कराया पैचवर्क

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की जर्जर सड़कों का मामला शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में फिर उठा। सुनवाई के दौरान एनएचएआई की नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) रिपोर्ट से ग्वालियर बायपास की खराब स्थिति सामने आई। मई 2026 के सर्वे में 36 किलोमीटर से अधिक हिस्से में सड़क की रफनेस निर्धारित मानक से ज्यादा मिली, जबकि 11.100 लेन किलोमीटर में 10 मिमी से अधिक गहरे गड्ढे दर्ज किए गए। रिपोर्ट में गड्ढों की स्थिति को खराब श्रेणी में रखा गया है। अदालत में एनएचएआई और नगर निगम ग्वालियर ने अपनी-अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की।

सर्वे में सामने आई सड़क की खराब स्थिति

एनएचएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुबंध के अनुसार सड़क की रफनेस प्रति किलोमीटर 2500 मिमी से कम होनी चाहिए, लेकिन बायपास के 36 किलोमीटर से अधिक हिस्से में यह सीमा पार हो गई। इसके अलावा 38.400 किलोमीटर में रटिंग 5 से 10 मिमी के बीच दर्ज की गई। ये आंकड़े सड़क की सतह की खराब स्थिति की ओर इशारा करते हैं।


रिपोर्ट में नवंबर 2023 और मई 2024 के सर्वे का ब्योरा भी सामने आया। नवंबर 2023 में नौ लेन किलोमीटर हिस्सा निर्धारित रफनेस सीमा से बाहर था और धंसाव की स्थिति खराब श्रेणी में थी। मई 2024 के सर्वे में रफनेस 7.80 लेन किलोमीटर दर्ज की गई थी और राइड क्वालिटी औसत बताई गई थी। मई 2026 के सर्वे में 36 किलोमीटर से अधिक हिस्से में रफनेस की समस्या सामने आने से सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं।

26.53 करोड़ रुपये की राशि एफडी में जमा

सड़क की स्थिति को लेकर एनएचएआई ने ठेकेदार की 26.53 करोड़ रुपये की एन्युइटी राशि केनरा बैंक में तीन महीने के लिए एफडी करा दी है। अदालत में रखी गई जानकारी के मुताबिक, सड़क के निर्धारित मानकों पर खरा उतरने तक कंपनी को भुगतान नहीं किया जाएगा। यह कदम सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चल रही न्यायिक कार्यवाही के बीच महत्वपूर्ण है।

नगर निगम ने 461 स्थानों पर पैचवर्क का दिया ब्योरा

शहर की सड़कों के संबंध में नगर निगम ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि 7 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 के बीच 461 स्थानों पर गड्ढे भरे गए। निगम के मुताबिक, चेतकपुरी, शारदा विहार, श्रीराम कॉलोनी, बसंत विहार, फूलबाग, विवेक विहार, चना कोठार, नया पायगा गुड़ी और जवाहर मार्ग सहित विभिन्न इलाकों में दिन और रात की शिफ्ट में पैचवर्क कराया गया।

निगम ने काम की स्थिति बताने के लिए गड्ढों की नाप-जोख, क्षेत्रफल और काम से पहले तथा बाद की जीपीएस टैग तस्वीरें भी अदालत में पेश कीं। हालांकि, पैचवर्क के इस ब्योरे से सड़क की समग्र गुणवत्ता और स्थायी सुधार की स्थिति का आकलन अलग विषय है।

याचिकाकर्ता ने मरम्मत पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने अदालत में दलील दी कि पुरानी सर्वे रिपोर्टों में भी ग्वालियर बायपास की गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आती रही हैं, लेकिन मरम्मत के प्रयास पर्याप्त नहीं रहे। सुनवाई में एनएचएआई की सर्वे रिपोर्ट और नगर निगम की पैचवर्क संबंधी जानकारी के जरिए सड़क की स्थिति तथा सुधार के प्रयासों का ब्योरा सामने आया।