जोगेंद्र सेन. नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर प्रवास के दूसरे दिन भी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया राजगढ़ दौरे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उनके परिवार पर किए गए हमले पर चुप्पी साधे हुए हैं। मीडिया के बार-बार सवाल करने पर उनका कहना था कि जो बोलना था। वह पहले ही बोल चुके हैं। अब उन्हें कुछ नहीं कहना है। दूसरी तरफ भाजपा व सिंधिया समर्थकों के दिग्विजय सिंह पर पलटवार करने पर कांग्रेसी भी अब खामोश हो गए हैं। यह विवाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राधौगड़ जाकर एक हजार को कांग्रेसियों को भाजपा में शामिल कराने के बाद शुरू हुआ। दिग्विजय सिंह ने रानी लक्ष्मीबाई के इतिहास को लेकर सिंधिया परिवार पर हमला बोला था। जवाब में भाजपा व सिंधिया समर्थकों ने दिग्विजय सिंह पर उनके परिवार का इतिहास के साथ पलटवार किया। अब दोनों तरफ से खामोशी है।
जवाबी हमले की रणनीति
महल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हमलावरों पर रणनीति बन गई है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हमलों पर खामोश नहीं रहना है। तथ्यों के साथ जवाब देना है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सिंधिया के अपने समर्थकों से हिदायत दी है कि अपनी तरफ से कोई पहल नहीं करनी है। इस रणनीति के तहत सिंंधिया अपने नगर प्रवास के दौरान इस मुद्दे पर खामौश है। शहर जिला कांग्रेस इस वाकयुद्ध मीडिया को जारी किया बयान वापस से चुकी है। सिंधिया व दिग्विजय सिंह के बीच राजनीति जंग नई नहीं है। लगभग डेढ़ दशक पहले दोनों के बीच एक दूसरे के क्षेत्रों में अपना प्रभाव साबित करने के लिए सभाओं की प्रतिद्वंदिता हो चुकी है। सिंधिया का कांग्रेस का अलविदा कहने का मूल कारण दिग्विजय सिंह को माना जाता है।