सम्राट मिहिर भोज विवाद: 5 साल बाद हाई कोर्ट पहुंची कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट, अब निष्कर्षों पर होगी सुनवाई
मामला 2021 में राहुल साहू की जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था। मिहिर भोज की प्रतिमा के नाम के साथ ‘गुर्जर’ लिखे जाने के बाद दोनों समाजों के दा...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 05:21:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 05:22:32 PM (IST)
HighLights
- कमेटी ने जुटाए ऐतिहासिक साक्ष्य
- वंशज ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
- कोर्ट में 2021 का आदेश प्रभावी
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर या क्षत्रिय समाज से जोड़ने के विवाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट पांच साल बाद कोर्ट में पेश कर दी गई है। सुनवाई में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है। अब रिपोर्ट के निष्कर्षों पर आगे की सुनवाई होगी।
मामला 2021 में राहुल साहू की जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था। मिहिर भोज की प्रतिमा के नाम के साथ ‘गुर्जर’ लिखे जाने के बाद दोनों समाजों के दावे को लेकर विवाद सामने आया था।
24 सितंबर 2021 को हाई कोर्ट ने मामले की पड़ताल के लिए कमेटी गठित की थी। ग्वालियर संभाग आयुक्त को इसका अध्यक्ष और आइजी ग्वालियर रेंज को उपाध्यक्ष बनाया गया था। दोनों समाजों के एक-एक प्रतिनिधि भी कमेटी में शामिल किए गए थे।
ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाए, दोनों पक्षों के अभ्यावेदन भी लिए
कमेटी को ऐतिहासिक साक्ष्यों और साहित्य के आधार पर दोनों समाजों के दावों की जांच करनी थी। इसके साथ ही यह भी देखना था कि सार्वजनिक धन से स्थापित किसी राष्ट्रीय नायक की प्रतिमा के नाम के साथ जाति का उल्लेख संवैधानिक भावना के अनुरूप है या नहीं। शासन की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार इतिहासकारों की रिसर्च, विभिन्न स्थानों से जुटाई गई जानकारी और दोनों समाजों के अभ्यावेदन को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
वंशज ने कहा- मेरा पक्ष नहीं सुना
सुनवाई में अरुणोदय सिंह ने खुद को सम्राट मिहिर भोज का वंशज बताते हुए कहा कि कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली, लेकिन उनका पक्ष नहीं सुना गया। उन्होंने इसी आधार पर रिपोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। शासन की ओर से बताया गया कि रिपोर्ट पहले ही सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश की जा चुकी है। इधर विधायक साहब सिंह गुर्जर की ओर से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने कोर्ट में कहा कि विधायक के क्षेत्र में गुर्जर समाज की बड़ी आबादी है। जनप्रतिनिधि होने के कारण समाज के लोग अपनी बात लेकर उनके पास आते हैं। इसी वजह से उन्हें ‘साफ्ट टारगेट’ बनाया जा रहा है।
2021 का कानून-व्यवस्था संबंधी आदेश प्रभावी
मामले में फिलहाल 2021 में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिया गया हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी है। उस समय प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही दोनों समाजों से संयम बरतने की अपेक्षा की गई थी। अब कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में आने के बाद मामले की अगली सुनवाई में इसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।