
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। लाइसेंसी हथियार बिक्री की डीलरशिप की आड़ में अवैध हथियारों के कारोबार के मामले में जिस डीलर अशोक अग्रवाल को पुलिस ने पकड़ा है, इसकी दुकान का लाइसेंस अशोक अग्रवाल के नाम ही नहीं है। यह लाइसेंस पत्नी रजनी अग्रवाल के नाम पर है, पहले आर्म्स डीलरशिप का लाइसेंस अशोक अग्रवाल के नाम था लेकिन इसने पत्नी के नाम पर लाइसेंस बनवा लिया था। वर्तमान में अशोक अग्रवाल दुकान का संचालन जरूर करता है लेकिन प्रशासन के रिकार्ड में रजिस्टर्ड डीलर अशोक अग्रवाल नहीं है।
अब मामले में पुलिस पड़ताल कर रही है लेकिन अभी तक जिला प्रशासन के पास पुलिस की रिपोर्ट नहीं पहुंची है। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रशासन डीलर के लाइसेंस को लेकर कार्रवाई करने की प्रक्रिया करेगा। इस मामले में एडीएम सीबी प्रसाद अपने स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं।
बता दें कि इंदरगंज क्षेत्र में इलेक्ट्रिक कार में दूध की टंकी लेकर जा रहे दूधिये गिर्राज गुर्जर को पुलिस ने पकड़ा था। उसकी दूध की टंकी से अवैध पिस्टल बरामद हुई थी। जब गिर्राज को थाने ले जाकर पूछताछ की तो उसने बताया कि एक लाख रुपये में शान गन हाउस के संचालक अशोक अग्रवाल से पिस्टल खरीदी थी। यह सुनकर तो पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। पुलिस टीम शान गन हाउस पर रवाना की गई। यहां से पुलिस ने संचालक अशोक अग्रवाल को भी हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस की पड़ताल जारी है।
पुलिस द्वारा खंगाली गई कुंडली से राजफाश हुआ है कि अशोक अग्रवाल केवल ग्वालियर ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश तक फैले एक बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का मुख्य सप्लायर रहा है। वह पहले भी अवैध हथियारों की तस्करी में पकड़ा जा चुका है और एक हत्या के मामले में भी उसकी संलिप्तता रही है। बिहार और उत्तरप्रदेश के जिलों में यह 35 साल पहले व्यापक स्तर पर हथियार सप्लाई करता था। पहले पुलिस ने नाइन एमएम पिस्टल गिर्राज गुर्जर से बरामद करना बताया था, बाद में 32 बोर की पिस्टल पकड़ने की बात कही। नाइन एमएम पिस्टल सेना, पुलिस पर होती है। आम लोगों के लिए यह प्रतिबंधित बोर है।
शान गन हाउस के मामले में पुलिस रिपोर्ट अभी नहीं आई है, पुलिस की रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। अन्य डीलरों को लेकर भी जांच कराएंगे और रिकार्ड मंगवाया जाएगा। -सीबी प्रसाद, एडीएम,ग्वालियर।