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20 साल बाद बिहार लौटा शंकर: ग्वालियर के DSP के एक वीडियो से मिली गुमशुदा बेटे की राह, बैंड- बाजों से हुआ स्वागत

ग्वालियर के स्वर्ग सदन आश्रम में आठ साल से रह रहे 43 वर्षीय शंकर को उसके बड़े भाई ने वीडियो कॉल पर पहचान लिया। परिजन ग्वालियर पहुंचे और उसे अपने साथ ग...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 03:54:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 03:55:01 PM (IST)
20 साल बाद बिहार लौटा शंकर: ग्वालियर के DSP के एक वीडियो से मिली गुमशुदा बेटे की राह, बैंड- बाजों से हुआ स्वागत

HighLights

  1. 2018 में ग्वालियर में मिला सहारा
  2. DSP के वीडियो ने मिलाया परिवार
  3. गांव पहुंचते ही उमड़ा खुशी का सैलाब

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। 20 साल पहले रिश्तेदारी में न्योता खाने के लिए घर से निकला मधुबनी (बिहार) का शंकर कुशवाह महतो अचानक लापता हो गया था। वर्षों तक तलाश के बाद परिवार ने उसे मृत मान लिया और उम्मीद छोड़ दी। दो दशक बाद एक वीडियो ने परिवार को उसका पता दे दिया। ग्वालियर के स्वर्ग सदन आश्रम में आठ साल से रह रहे 43 वर्षीय शंकर को उसके बड़े भाई ने वीडियो कॉल पर पहचान लिया। परिजन ग्वालियर पहुंचे और उसे अपने साथ गांव ले गए। 20 साल बाद घर लौटे शंकर का ग्रामीणों ने बैंड-बाजों के साथ स्वागत किया।

2018 में रेलवे स्टेशन पर मिला था

शंकर वर्ष 2018 में ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर बेहद दयनीय हालत में मिला था। वह अपना पता बताने में सक्षम नहीं था। स्वर्ग सदन आश्रम के संस्थापक विकास गोस्वामी उसे आश्रम ले आए। देखरेख और इलाज के बाद उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ। वह परिजनों के नाम बताने लगा, लेकिन घर का पता याद नहीं था।


वीडियो ने दो दशक पुराना रिश्ता जोड़ दिया

कुछ दिन पहले ग्वालियर में पदस्थ रहे डीएसपी संतोष पटेल आश्रम पहुंचे थे। वर्तमान में भोपाल में पदस्थ पटेल ने शंकर का वीडियो बनाकर अपने अकाउंट पर साझा किया। वीडियो अपलोड होने के करीब 48 घंटे बाद बिहार से शंकर के बड़े भाई लल्लन का विकास गोस्वामी के पास फोन आया। वीडियो कॉल पर शंकर को देखते ही लल्लन ने उसे पहचान लिया और भावुक होकर रोने लगा।

गांव पहुंचते ही उत्सव जैसा माहौल

पहचान की पुष्टि होने के बाद परिजन ग्वालियर पहुंचे और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शंकर को अपने साथ ले गए। जब वह 20 साल बाद अपने पैतृक गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने बैंड-बाजों के साथ उसका स्वागत किया। बेटे को दो दशक बाद सामने देखकर उसके वृद्ध माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।