
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर मौत का तांडव मचाने वाले ओवरलोडेड ट्रक ने 15 लोगों को रौंद डाला और 42 मासूमों, महिलाओं व बुजुर्गों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस वीभत्स हादसे के बाद ग्वालियर के झांसी रोड थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसे में जिस ट्रक से टक्कर हुई, उसके चालक को राहगीरों ने टोका था कि आगे मंदिर है और भारी भीड़ है, लेकिन वह ट्रक आगे बढ़ाता चला गया। ढलान पर जाकर ब्रेक फेल हुए और तबाही मची। हादसे से करीब साढ़े तीन किलोमीटर पहले तोड़ा गांव में पुलिस स्टापर लगाकर रास्ता बंद था। पुलिस की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर चालक खुद स्टापर हटाकर ट्रक अंदर ले गया। इस ट्रक में क्षमता से अधिक धान भरा हुआ था। ढलान देखकर भी चालक ने गाड़ी नहीं रोकी, जिससे तकनीकी खामी और ब्रेक फेल होने का जोखिम और बढ़ गया।
पुलिस ने आरोपित ट्रक चालक दिलबाग सिंह के खिलाफ एक्सीडेंट की ऐसी तीन धाराओं में केस दर्ज किया है, जिनमें थाने से ही जमानत मिलने का प्रविधान है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष गुप्ता का कहना है कि चालक को ओवरलोडिंग से खतरे व भीड़ की जानकारी थी, तब भी लापरवाही बरतना गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है।
जबकि पुलिस ने ऐसा करने के बजाय तीन धाराओं- 106(1) यानी लापरवाही या जल्दबाजी के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु, जिसमें अधिकतम पांच साल की सजा है, धारा 125(ए) यानी लापरवाही से किए गए कार्य जिससे जीवन या सुरक्षा को खतरा पैदा हो, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा है और धारा 281 यानी सार्वजनिक स्थान पर खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, जिसमें अधिकतम छह माह की सजा है, में ही एफआईआर दर्ज की है।
वहीं झांसी रोड थाना प्रभारी आशीष शर्मा का कहना है कि अभी एक्सीडेंट से मौत की धारा में एफआईआर की है। विवेचना में जैसे तथ्य आएंगे, उस आधार पर आगे धारा बढ़ाई जाएगी।
आरोपित चालक अभी पुलिस हिरासत में ही है। उससे पूछताछ चल रही है। पुलिस ने ट्रक मालिक मोहित सिंह को भी हिरासत में लिया है। आरोपित चालक शराब के नशे में था या नहीं, इसकी जांच के लिए ब्लड सैंपल लिया गया है, लेकिन नवमी और दशहरा का अवकाश होने के कारण सैंपल बुधवार को जांच के लिए भेजा जाएगा।