ग्वालियर (ब्यूरो)। भिंड-मुरैना में बनने वाले नकली (सिंथेटिक) दूध से तैयार होने वाला मावा व पनीर ग्वालियर ही नहीं देश की राजधानी सहित बड़े-बड़े शहरों में रोज सप्लाई होता है। सफेद दूध के इस काले धंधे के तार देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुम्बई-इंदौर तक जुड़े हैं।

अंचल के भिंड-मुरैना से प्रतिदिन 4 लाख लीटर सिंथेटिक दूध की सप्लाई टैंकरों से धौलपुर, आगरा और दिल्ली तक की जाती है। इसी तरह 1200 क्विंटल मावा और 100 क्विंटल पनीर की सप्लाई ग्वालियर से लेकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल सहित छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक हो रही है। इस मिलावटखोरी के कारोबार की भनक स्थानीय प्रशासन से लेकर बस ऑपरेटर व रेलवे विभाग को भी है। इन सभी की सांठगांठ से यह कारोबार रातों रात फलफूल रहा है। इस पर अंकुश लगाने के लिए न कभी नाकाबंदी की गई और न ही प्रभावी चेकिंग हुई। यही कारण है कि मिलावटखोरी का जाल देश के आधे हिस्से में फैल चुका है।

इस तरह होती दूध की सप्लाई

गांव में दूधिया घर-घर से शुद्ध दूध इकट्ठा करता है। इसके बाद वह अपने घर पर शुद्ध दूध से फैट निकालकर उसका घी तैयार करते हैं। बचे हुए दूध में चार गुना अधिक सिंथेटिक दूध तैयार कर मिलाया जाता है। यह दूध डेरियों, भट्टियों पर पहुंचता है। यहां दूध के एक हिस्से का मावा तैयार होता और बाकी बचा दूध टैंकरों में भरकर धौलपुर, आगरा, दिल्ली व यूपी के कुछ शहरों के लिए रवाना कर दिया जाता है। प्रतिदिन भिंड-मुरैना से 2-2 लाख लीटर दूध की सप्लाई की जाती है। शुद्ध घी में भी वनस्पति व घी का फ्लेवर मिलाकर मिलावटी घी तैयार किया जाता है।

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मुरैना से मावा-पनीर की इस तरह होती सप्लाई

मुरैना में प्रतिदिन करीब 1000 क्विंटल मावा व 50 क्विंटल पनीर तैयार किया जाता है। यह माल निजी वाहनों द्वारा गांव से मुरैना भेजा जाता। यहां पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में सबसे अधिक माल लोड होता है। यह ट्रेन मावा व पनीर को दुर्ग, भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, महाराष्ट्र व नागपुर तक लेकर जाती है। इसके बाद उत्कल एक्सप्रेस से उड़ीसा भेजा जाता है। पंजाब एक्सप्रेस द्वारा भोपाल, इटारसी तक सप्लाई किया जाता है। निजी वाहन से मावा ग्वालियर के छत्रीमंडी, मोर बाजार, कंपू व रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया जाता है। यहां से वीडियो कोच बस द्वारा इन्दौर, भोपाल, उज्जैन, गुना व शिवपुरी के लिए मावा व पनीर की सप्लाई की जाती है। वीडियो कोच बस पर एक डलिया मावा का किराया 200 से 250 रुपए निर्धारित है।

भिंड से इन शहरों में जाता मावा पनीर

भिंड में सिंथेटिक दूध से मावा व पनीर बनाने के लिए करीब सवा सौ भट्टियां संचालित हो रही हैं। ऊमरी, लहार, मौ, अटेर, गोहद, मेहगांव व भिंड में प्रतिदिन करीब 200 क्विंटल मावा और 50 क्विंटल पनीर तैयार किया जाता है। इन भट्टियों पर तैयार होने वाला मावा व पनीर को निजी वाहन द्वारा आसपास के शहर जलौन, झांसी, इटावा, उरई, ग्वालियर, धौलपुर व आगरा तक भेजा जाता है। ग्वालियर में गोहद, मेहगांव व मौ से मावा सप्लाई किया जाता है।

नाकाबंदी कर होती चेकिंग तो रुक जाती मिलावटखोरी

ग्वालियर में प्रवेश करने के लिए चार रास्ते हैं। भिंड से आने वाला रास्ता महाराजपुरा, मुरैना से पुरानी छावनी, शिवपुरी से आने वाला वेला की बावड़ी, और झांसी से आने वाला रास्ता अडूपुरा है। इन चार रास्तों पर न तो कभी नाकाबंदी कर चेकिंग की गई। तीज त्यौहार पर ही खाद्य विभाग सैंपलिंग कर खानापूर्ति करता है। स्थानीय प्रशासन ने भी इसमें रुचि नहीं दिखाई। यदि इस ओर ध्यान दिया जाता तो पुलिस, प्रशासन व खाद्य विभाग की संयुक्त प्रभावी कार्यवाई की जाती और इस कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता था।

इस तरह होता मावा तैयार

शुद्ध दूध में सिंथेटिक दूध मिलाकर तो दूध तैयार किया जाता है, लेकिन इस सिंथेटिक दूध से मावा व पनीर तैयार हो इसके लिए शैंपू, डिटर्जेंट, घटिया क्वालिटी का तेल व मठे का पाउडर मिलाया जाता है। गांव में किसान मठा सुखाकर 6 से 10 रुपए किलो में बेचते हैं। इसे खरीदकर मिलावटखोर इसका पाउडर तैयार करते हैं और इसे सिंथेटिक दूध में मिलाकर मावा व पनीर तैयार करते हैं।

मैं भी इस दिशा में कदम उठाऊंगा

यह गंभीर मामला है। यदि इस तरह से नकली मावा, पनीर व दूध तैयार हो रहा है तो स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रेन से सप्लाई होता है तो मैं पॉलिसी की स्टडी करूंगा और समय-समय पर सैंपलिंग कर जांच की जाएगी। यदि मावा व पनीर नकली मिलता है तो ठोस कार्रवाई भी होगी- संदीप माथुर, डीआरएम झांसी मंडल