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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Swara Bhaskar का बयान, पिछले वर्ष हमने एक आतंक की आरोपित को संसद भेजा

Swara Bhaskar : स्वरा भास्कर बोली, आज ऐसा माहौल है कि सवाल उठाने पर देशद्रोही करार दे दिया जाता है।

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 07 Mar 2020 09:44:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 08 Mar 2020 11:13:16 AM (IST)
Swara Bhaskar का बयान, पिछले वर्ष हमने एक आतंक की आरोपित को संसद भेजा

Swara Bhaskar ग्वालियर। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के बिटिया उत्सव में विवादित बयान देते हुए कहा कि पिछले ही साल हमने एक आतंक की आरोपित को संसद में भेजा है। उन्हें लोकतंत्र के अनुसार एक अच्छे खासे वोटों से जिताकर भेजा है। वो हमें एंटीनेशनलिस्ट नहीं लगता है। इस मामले में अभिभाषक रविंद्र दीक्षित ने शनिवार को एसपी नवनीत भसीन को ज्ञापन देकर बताया कि उत्सव में अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने दिल्ली दंगों को लेकर भड़काऊ भाषण देने और दिल्ली पुलिस पर धर्म विशेष के लोगों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया। उनके भाषण से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। दीक्षित व उनके साथियों ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम के सूत्रधार संयुक्त संचालक सुरेश तोमर व अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।

स्वरा भास्कर ने कहा कि हर इंसान अलग-अलग पहचान लेकर चलता है जो वक्त और संदर्भ के अनुसार बदलती है। मैं स्टेज पर बैठी हूं तो मेरी प्राथमिक पहचान एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी की है। मैं जब देश के बाहर जाती हूं तो यही पहचान एक हिंदुस्तानी बन जाती है। यूएसए जाते हैं और कुछ एशियन लोग मिलते हैं तो यही हमारी पहचान बन जाती है। आप देखिए वहां भारत-पाकिस्तान लोग माइनॉरिटी में होते हैं तो वहां हमारी खूब बनती है। यदि मैं ऐसे संदर्भ में हूं जहां जाति का मुद्दा भड़का हुआ है तो मेरी जाति मेरी पहचान होगी और यह मुझे सुरक्षा भी देगी। दिल्ली में दंगे हो रहे हैं और यदि मैं दिल्ली जाती हूं तो मेरी सबसे हावी पहचान होगी कि मैं एक हिंदू हूं और चूंकि हिंदू हूं तो दिल्ली पुलिस मुझ पर उस हक और बर्बरता से लाठी नहीं मारेगी जैसे उसने मुस्लमान पर चलाई है।


स्वरा भास्कर ने कहा कि जिस तरह की राजनीति हो रही है और मानसिकता आ गई है कि एक ही आइडेंटिटी होगी। 'वन नेशन-वन लेंग्वेज और 'वन नेशन-वन आइडेंटिटी होगी, क्यों? जहां पर इतनी विविधता होगी वहां लड़ाईयां और विवाद होगा। किसी भी सभ्य समाज के लिए इतना होना चाहिए कि जो भी विवाद हों वे एक कानून की ढांचे में डील किया जाए।

न कि सड़कों पर उतर कर भीड़ तंत्र बनकर या भीड़ की राजनीति कर नहीं। दूसरी बात है कि कोई भी ऐसी सोच जो नफरत और भय का इस्तेमाल कर रही है एक आइडेंटिटी बनाने के लिए उस पर शक करना चाहिए। चाहे वो ऐतिहासिक उदाहरण या अन्य चीजें बता रहे हों, नफरत सही नहीं हो सकती है। दया की भावना हमें इंसान बनाती है। जो भी विचारधारा आपके अंदर इस दयाभाव को मार रही है, वह सही नहीं हो सकती। साथ ही उन्होंने कहा कि आज ऐसा माहौल है कि सवाल उठाने पर देशद्रोही करार दे दिया जाता है।

नहीं पता था कि एक वायरल वीडियो बवाल कर देगा

एक सवाल के जवाब में स्वरा ने कहा कि फिल्म जगत का समाज से कुछ लेना देना नहीं है, इससे बड़ी मिथ्या कोई और हो नहीं सकती है। फिल्में एक ऐसा माध्यम हैं जिसकी ताकत अब सबके साथ सरकार भी महसूस कर रही है। जब हम पढ़ते हैं कि कश्मीर में एक इंसान को ह्युमन शील्ड बनाया गया तो 6 महीने बाद वही दृश्य फिल्म में भी दिखाई देता है। यदि हम आम जीवन में सलमान खान की तेरे नाम वाले हेयर कट करा कर घूम रहे होते हैं, तो फिल्में भी उसी तरह समाज के प्रभावित हो रही होती हैं। हम कलाकार भी इस दुनिया में शामिल हैं। वोट और टैक्स देते हैं तो अपने आसपास जो हो रहा है उसमें शामिल होना चाहिए। मैंने महसूस नहीं किया था कि जिस तरह सोशल मीडिया का बूम हुआ और सेलफोन पर एक वीडियो क्लिप बनाकर उसे वायरल कर सकते हैं। इसलिए महसूस नहीं किया कि एक बात कहने पर इतना बड़ा बवाल हो जाएगा। सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे लोग ट्रोल करते हैं जिनमें खुद की प्रोफाइल पिक्चर लगाने तक की ताकत नहीं है। वहां भी लड़की को छेड़े जाने या गलत बोलने पर आवाज उठाना चाहिए।