बैंक ने किसान से मांगे थे 8.59 लाख, खातों में बकाया शून्य मिलने पर हाईकोर्ट ने वसूली नोटिस किया निरस्त
संतोषजनक जानकारी न मिलने पर मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 10:05:57 AM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 10:43:10 AM (IST)
HighLights
- खातों में बकाया शून्य मिलने पर कोर्ट के सवाल
- बैंक नहीं दे सका बकाया राशि का संतोषजनक हिसाब
- हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये लौटाने के दिए निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ट्रैक्टर ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड खाते में बकाया बताकर बैंक ने किसान को 8.59 लाख रुपये वसूलने का नोटिस जारी किया था। किसान ने ऋण की राशि जमा करने का दावा करते हुए बैंक से खातों का पूरा हिसाब मांगा। संतोषजनक जानकारी न मिलने पर मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।
सुनवाई के दौरान बैंक के दस्तावेजों में दोनों ऋण खाते बंद और बकाया राशि शून्य दर्ज मिली। इस पर हाई कोर्ट ने वर्ष 2012 में जारी बैंक के मांग नोटिस को निरस्त कर दिया।
पांच जनवरी 2012 को बैंक अधिकारियों ने ट्रैक्टर भी कर लिया था जब्त
न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने लक्ष्मीनारायण मिश्रा की याचिका पर 29 अक्टूबर को यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता एसएस गौतम ने बताया कि याची ने बैंक से कृषि ऋण लिया था। बैंक ने 15 मार्च 2012 को आठ लाख 59 हजार 971 रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया। इससे पहले पांच जनवरी 2012 को बैंक अधिकारियों ने उसका ट्रैक्टर भी जब्त कर लिया था।
सुनवाई के दौरान बैंक ने अपने जवाब में ट्रैक्टर ऋण के चार लाख 42 हजार 968 रुपये और किसान क्रेडिट कार्ड के दो लाख 32 हजार 213 रुपये बकाया बताए थे। दोनों पर ब्याज भी बताया गया था। बाद में बैंक की ओर से पेश खाता विवरण में छह दिसंबर 2018 को दोनों खाते बंद होने और उनमें कोई बकाया नहीं होने की जानकारी दर्ज थी। कोर्ट ने कहा कि बैंक इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सका। केवल बकाया होने का दावा करके वसूली जारी नहीं रखी जा सकती।
एक लाख की जमा राशि लौटाने के निर्देश
हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि अंतरिम आदेश के पालन में किसान ने 21 जून 2012 को एक लाख रुपये जमा किए थे। कोर्ट ने बैंक को इस जमा राशि का सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी अन्य वैध और प्रमाणित देनदारी का समायोजन नहीं बनता है तो शेष राशि आठ सप्ताह के भीतर किसान को लौटानी होगी।