ग्वालियर: बिना मान्यता और दस्तावेजों के चल रहे मदरसे पर बाल आयोग का छापा, 22 बच्चे रेस्क्यू
अधिकारियों को यह भी पता चला कि यहां बच्चों की नियमित पढ़ाई नहीं होती है और यहां बच्चों को देखने वाला भी कोई नहीं है। स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है।
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 07:54:39 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 07:55:18 PM (IST)
एजी ऑफिस के बगल में स्थित मदरसे पर जांच करते अधिकारीगण। सौजन्यHighLights
- कमरों में बंद मिलीं बच्चियां, नहीं थे दस्तावेज
- बाल कल्याण समिति को मिली थी गुप्त सूचना
- गृहों में भेजे गए बच्चे, आगे की कार्रवाई जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग ने शुक्रवार को ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में छापामार कार्रवाई की। यहां से आयोग की अध्यक्ष ने महिला बाल विकास विभाग व बाल कल्याण समिति के साथ 22 बच्चों को रेस्क्यू कराया। मौके पर जब मदरसे संचालक से दस्तावेज और मान्यता मांगी गई तो कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
रेस्क्यू कराए गए बच्चों में 15 बालक व 8 बच्चियां शामिल
अधिकारियों को यह भी पता चला कि यहां बच्चों की नियमित पढ़ाई नहीं होती है और यहां बच्चों को देखने वाला भी कोई नहीं है। स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है। यहां चार साल से लेकर 16 साल के बच्चे व बच्चियां मिलें। रेस्क्यू कराए गए बच्चों में 15 बालक व आठ बच्चियां शामिल हैं। बाल कल्याण समिति की निगरानी में सभी बच्चों को अलग अलग उम्र अनुसार गृहों में रखवा दिया गया है। मदरसे में कुछ माता पिता भी पहुंच गए थे जो बच्चों को ले जाने पर हैरत जता रहे थे।
बाल कल्याण समिति को मिली थी सूचना
बाल कल्याण समिति को यह सूचना मिली थी कि एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में गैर मान्यता के अवैध ढंग से बच्चों को रखा जा रहा था। यह सूचना राज्य बाल सरंक्षण आयोग को पहुंची तो अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने खुद जाकर अधिकारियों के साथ छापामार कार्रवाई की। यहां पहुंचने के बाद पूरे मदरसे का निरीक्षण किया गया और रिकार्ड मांगा गया। यहां अलग अलग कक्ष बने थे और बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था थी।
निरीक्षण के दौरान पाया कि सुरक्षा व देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं थी दोपहर से शाम तक चली कार्रवाई के दौरान मदरसे का प्रबंधन कोई दस्तावेज नहीं दे सका। वहीं मदरसा प्रबंधन ने मौके पर बच्चों को फौरन छोड़ने की मांग की और कहा कि दस्तावेज देने में समय लगता है।
कमरों में बंद मिलीं बच्चियां, अधिकारियों से छिपाया
राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने बताया कि मदरसे को लेकर शिकायत मिली थी कि यहां अवैध रूप से बालक बालिकाओं को रखा जा रहा है। निरीक्षण व जांच के बाद सामने आया कि मदरसा प्रबंधन पर कोई मान्यता नहीं है। तीन बच्चियां कमरे में बंद मिलीं जिसकी जानकारी यहां के प्रबंधन ने नहीं दी थी। जांच के दौरान यह पता चला कि कुछ बच्चियां कमरे में हैं।
10 से 12 साल के बच्चे ज्यादा
मदरसे से जो बच्चे रेस्क्यू कराए गए हैं उनमें सबसे ज्यादा 10 से 12 साल के बच्चे हैं, एक बच्चा सोलह साल का शामिल है और छोटे बच्चे भी हैं। छोटे बच्चों को शिशु गृह में भिजवाया गया है।
कुछ दिन पहले इसी मदरसे से लापता हुआ था बालक
सागरताल के मेवाती मोहल्ले का मूल निवासी परिवार का 13 वर्षीय बालक एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसा दारूल कुरान में रहकर पढ़ाई करता था जो 14 अक्टूबर की रात वह मदरसे में ही था, लेकिन 15 अक्टूबर की सुबह वहां नहीं मिला। थाने में शिकायत दर्ज की गई। बाद में वह बालक मिल गया।
बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि मदरसे में बच्चे रह रहे हैं और मान्यता नहीं है। इस सूचना पर राज्य बाल सरंक्षण आयोग ने निरीक्षण व जांच किया और 22 बच्चों को रेस्क्यू कर गृहों में रखवाया गया है। एक्ट के तहत जांच की जा रही है। - मनीषा शर्मा, बाल कल्याण समिति