बांग्लादेशी युवतियों की मानव तस्करी: जम्मू से जुड़ा गिरोह का नेटवर्क, 3 को पहले भेजा, ग्वालियर में पकड़े गए आरोपी
पुलिस के सामने पूछताछ में मोहम्मद अली, हसन और मोबीन के नाम सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि मोहम्मद अली बांग्लादेश के कॉक्स बाजार क्षेत्र से युवति...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:05:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:06:19 PM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- कॉक्स बाजार से लाकर जम्मू में आदिल को सौंपी जाती थीं युवतियां
- तीन हफ्ते पहले भेजी गई पहली खेप की तलाश में जुटी पुलिस
- पारिवारिक सहमति के दावे की पड़ताल कर रहीं जांच एजेंसियां
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बांग्लादेश से चार युवतियों को अवैध तरीके से भारत लाने के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, गिरोह का जम्मू कनेक्शन सामने आ रहा है। रेलवे पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि ग्वालियर में पकड़ी गई चार युवतियों से पहले इसी गिरोह ने तीन युवतियों को जम्मू पहुंचाया था। करीब तीन सप्ताह पहले हुई इस गतिविधि के बाद दलालों ने फिर से चार युवतियों को भारत लाने की कोशिश की, लेकिन इस बार उनका नेटवर्क पकड़ में आ गया।
पहली बार 3 युवतियों को जम्मू पहुंचाने में गिरोह कामयाब रहा
पुलिस के सामने पूछताछ में मोहम्मद अली, हसन और मोबीन के नाम सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि मोहम्मद अली बांग्लादेश के कॉक्स बाजार क्षेत्र से युवतियों को लेकर आता था। भारत पहुंचने के बाद युवतियों को जम्मू में रहने वाले आदिल नामक व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था। पहली बार तीन युवतियों को जम्मू पहुंचाने में गिरोह कामयाब रहा। इसके बाद दूसरी बार चार युवतियों को लाया गया।
पहली खेप की युवतियां कहां मिलेंगी
अब जांच अधिकारियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि पहली खेप की तीन युवतियां इस समय कहां हैं। पुलिस जम्मू में उनके ठिकाने और उन लोगों की जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने युवतियों को वहां रिसीव किया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि जम्मू पहुंचने के बाद इन युवतियों के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई और शादी कराने के नाम पर उन्हें किन लोगों के संपर्क में लाया गया।
परिवार की रजामंदी की बात, लेकिन जांच बाकी
पूछताछ में पकड़े गए लोगों ने यह जरूर कहा है कि युवतियों को उनके परिवार की सहमति से भारत लाया गया था। हालांकि पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि यदि परिवार की सहमति थी तो भारत में प्रवेश की प्रक्रिया वैध क्यों नहीं अपनाई गई और युवतियों को सीमा पार कराने की जरूरत क्यों पड़ी। पुलिस को आशंका है कि शादी का प्रस्ताव दिखाकर युवतियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। इसी कारण अब जांच ग्वालियर में पकड़े गए लोगों से आगे बढ़कर बांग्लादेश से जम्मू तक जुड़े संपर्कों पर केंद्रित हो गई है।
पूछताछ में भाषा बनी सबसे बड़ी परेशानी
मामले में चारों युवतियों से जानकारी हासिल करना जांच टीम के लिए आसान नहीं हो रहा है। युवतियां बांग्ला भाषा बोलती हैं, जबकि पूछताछ करने वाले अधिकारियों को अनुवादक की जरूरत है। सोमवार को अनुवादक उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण युवतियों से विस्तृत बातचीत नहीं हो सकी। भाषा की समस्या के कारण पुलिस यह जानने में भी सफल नहीं हो सकी कि युवतियां बांग्लादेश में कहां रहती थीं, भारत आने के लिए उनसे किसने संपर्क किया और यहां पहुंचने के बाद उन्हें किन लोगों के हवाले किया जाना था। अब बांग्ला भाषा जानने वाले स्थानीय अनुवादक की सहायता लेने की तैयारी है।
आईबी और इंटेलिजेंस भी जुटा रही जानकारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईबी और इंटेलिजेंस की चार सदस्यीय टीम भी ग्वालियर पहुंची। टीम ने युवतियों से जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन अनुवादक उपलब्ध नहीं होने के कारण पूछताछ आगे नहीं बढ़ सकी। अब इन एजेंसियों की नजर भी उस पूरे संपर्क तंत्र पर है, जिसके जरिए युवतियां बांग्लादेश से भारत और फिर जम्मू तक पहुंचाई जा रही थीं।
दो युवतियों के नाबालिग होने की जानकारी
रविवार को जीआरपी ने कार्रवाई करते हुए चार विदेशी युवतियों सहित छह लोगों को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक चारों युवतियों को शादी कराने के उद्देश्य से बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत लाया गया था। इनमें दो के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल चारों को शेल्टर होम में रखा गया है।