नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल से मानसून की विदाई के बाद से ही मौसम के मिजाज में अचानक आए बदलाव और बढ़ते तापमान ने ग्वालियर-चंबल संभाग के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर का पहला सप्ताह बीत जाने के बावजूद दिन का तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। इस असामान्य गर्मी और बढ़े हुए तापमान के कारण अंचल की मुख्य नकदी फसल सरसों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
सरसों की खेती का गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल
ग्वालियर-चंबल अंचल को सरसों की खेती के लिए गढ़ माना जाता है। इस रबी सीजन में अकेले ग्वालियर जिले में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वहीं, चंबल संभाग के प्रमुख उत्पादक जिलों मुरैना और भिंड में सरसों का लक्ष्य पांच लाख हेक्टेयर से अधिक है।
सामान्य तौर पर अंचल में एक अक्टूबर के बाद से सरसों की बोवनी की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस बार गर्मी के कारण काम अटका हुआ है।
तापमान का गणित और झुलसने का खतरा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों की समय पर बोवनी के लिए अनुकूल तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के मध्य होना चाहिए। हालांकि, वर्तमान में दिन का तापमान छह से सात डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि इस उच्च तापमान में बोवनी कर भी दी जाए तो अंकुरण के बाद छोटे पौधों को सहने के लिए भी तापमान 30 से 31 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए।
यदि तापमान इससे ऊपर रहता है तो कोमल पौधे झुलसकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे किसानों को बीज और मजदूरी का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस बार किसान ज्यादा बोना चाहते है सरसों
इस बार ग्वालियर चंबल के किसान अधिक सरसों की बोवनी करना चाहते हैं, क्योंकि पिछले साल भी सरसों के भाव समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक आठ हजार तक बिकी है। साथ ही इस बार केंद्र सरकार ने भी सरसों की एमएसपी को 413 रुपये से बढ़ाकर 6613 रुपये प्रति क्विंटल किया है। यानि इस बार सरसों के भाव और ऊंचे जाएंगे, इसलिए इस बार किसान सरसों की बोवनी अधिक करना चाहते हैं।
किसान तापमान के नीचे आने और मौसम में ठंडक बढ़ने का इंतजार करें, अभी 20 अक्टूबर तक बोवनी का समय है। जिन खेतों में पलेवा यानि सिंचाई कर बोवनी की तैयारी की जा चुकी है, वहां खेत की नमी को बचाकर रखें। अक्टूबर के मध्य तक तापमान में गिरावट आने की संभावना है, जिसके बाद ही बुवाई शुरू करना सुरक्षित रहेगा। - डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह, कृषि विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र