LNIPE में छात्रा 'श्रुति उपाध्याय' की मौत पर बवाल: कुलपति संग 4 घंटे बैठक के बाद भी बेनतीजा, 50 लाख मुआवजे पर अड़े छात्र
बैठक के बाद छात्र कुछ देर के लिए धरना समाप्त करने को तैयार हुए, लेकिन बाद में अपना फैसला बदलकर दोबारा संस्थान के गेट पर धरने पर बैठ गए।
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 09:27:40 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 09:28:02 PM (IST)
छात्रों के सामने अपनी बात रखतीं एलएनआइपीई कुलपति प्रो. कल्पना शर्मा। नईदुनियाHighLights
- मुआवजे और इस्तीफे पर फंसा पेंच
- खेल मंत्रालय से भी नहीं मिली राहत
- मेन गेट पर दोबारा शुरू हुआ धरना
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। एलएनआइपीई गुवाहाटी कैंपस की छात्रा श्रुति उपाध्याय की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर ग्वालियर परिसर के गेट पर चल रहा छात्रों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। आंदोलन खत्म कराने और मामले को सुलझाने के लिए मंगलवार को एलएनआइपीई की कुलपति प्रो. कल्पना शर्मा और धरना दे रहे छात्रों के बीच करीब चार घंटे तक बैठक हुई।
फैसला बदलकर दोबारा संस्थान के गेट पर धरने पर बैठ गए छात्र
सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चली बैठक में कई मांगों पर चर्चा हुई जिसमें अधिकतर मान्य हो गईं, लेकिन 50 लाख रुपये मुआवजे और कुलसचिव के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक के बाद छात्र कुछ देर के लिए धरना समाप्त करने को तैयार हुए, लेकिन बाद में अपना फैसला बदलकर दोबारा संस्थान के गेट पर धरने पर बैठ गए।
छात्रों ने बैठक में श्रुति के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और संस्थान के कुलसचिव का इस्तीफा लेने की मांग रखी। कुलपति ने दोनों मांगों को मानने से मना कर दिया। उनका कहना था कि संस्थान के नियमों के अनुसार जितना मुआवजा दिया जा सकता था, वह दिया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त भी सभी लोग मिलकर परिवार की मदद के लिए जो संभव होगा, वह करने का प्रयास करेंगे। हालांकि छात्रों की ओर से 50 लाख रुपये की मांग पर लिखित सहमति नहीं बनी।
खेल मंत्रालय से भी नहीं मिला 50 लाख का आश्वासन
छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल इस मामले को लेकर खेल मंत्रालय भी गया था। छात्रों के मुताबिक वहां भी उन्हें 50 लाख रुपये मुआवजा देने में असमर्थता जताई गई। मंत्रालय की ओर से भी नियमों के तहत जितना मुआवजा दिया जा सकता है, उतना देने की बात कही गई। इसके बाद छात्रों की यह मांग अब भी पूरी नहीं हो सकी है। बैठक में छात्रों ने श्रुति की मौत के लिए संस्थान की जवाबदेही तय करने और कुलसचिव के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। कुलपति ने इस मांग को भी स्वीकार नहीं किया। इसके चलते बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
धरना खत्म करने के बाद फिर बैठे गेट पर
बैठक के दौरान छात्रों ने कुछ समय के लिए आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई थी। हालांकि बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया और फिर संस्थान के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों का आरोप है कि श्रुति की तबीयत खराब होने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं मिला।
उनका कहना है कि श्रुति बीपीएड तृतीय वर्ष की छात्रा और टेनिस खिलाड़ी थी। छात्रों के अनुसार, तबीयत बिगड़ने के बाद भी उसे स्वास्थ्य केंद्र में पेट दर्द और गैस की समस्या बताकर दवाएं दी गईं। बाद में उसकी हालत गंभीर हुई और इलाज के दौरान सात सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसी मामले में छात्र संस्थान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।