ग्वालियर में कागजी आबकारी मुख्यालय... भोपाल से चल रहा विभाग, कमिश्नर सिर्फ दो बार पहुंचे
ग्वालियर में आबकारी मुख्यालय पहले ऐतिहासिक भवन मोतीमहल में स्थित था, जहां बिल्डिंग कंडम घोषित होने के बाद इसे राजस्व भवन विवेकानंद नीडम पुल के पास शिफ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 07 Sep 2026 04:55:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 07 Sep 2026 04:55:39 PM (IST)
HighLights
- भोपाल से हो रहा संचालन
- ग्वालियर मुख्यालय की अनदेखी
- फाइलों के आने-जाने में देरी
वरुण शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से मौतों के मामले के बाद आबकारी विभाग की निगरानी और कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ऐसे समय में प्रदेश के आबकारी विभाग के मुख्यालय की स्थिति भी चर्चा में है। विभाग का मुख्यालय ग्वालियर के राजस्व भवन में है, लेकिन विभाग के मुखिया आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना यहां नियमित रूप से नहीं बैठते।
फरवरी 2026 में शासन ने उन्हें आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से वे ग्वालियर स्थित मुख्यालय में अब तक केवल दो बार पहुंचे हैं। विभाग का अधिकांश काम भोपाल स्थित कैंप कार्यालय से संचालित होता है।
कई फाइलों को निर्णय के लिए भेजना पड़ता है भोपाल
विभागीय कामकाज में एक और व्यावहारिक परेशानी यह है कि ग्वालियर स्थित मुख्यालय से तैयार होने वाली कई फाइलों को निर्णय के लिए भोपाल भेजना पड़ता है। इससे फाइलों की आवाजाही के साथ समय भी लगता है। जबकि आबकारी विभाग जैसे राजस्व और कानून-व्यवस्था से सीधे जुड़े विभाग में जिलों की लगातार मॉनिटरिंग, अधिकारियों के साथ समीक्षा और त्वरित निर्णय की जरूरत रहती है।
बता दें कि ग्वालियर में आबकारी मुख्यालय पहले ऐतिहासिक भवन मोतीमहल में स्थित था, जहां बिल्डिंग कंडम घोषित होने के बाद इसे राजस्व भवन विवेकानंद नीडम पुल के पास शिफ्ट कर दिया गया। यहां आबकारी मुख्यालय है जरूर लेकिन पूरा नियंत्रण भोपाल स्थित कैंप आफिस से चलता है। आयुक्त आबकारी मुख्यालय नहीं भोपाल ही स्थाई तौर पर बैठते हैं यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है। यहां उपायुक्त, अपर आयुक्त स्तर के विभिन्न शाखाओं के अधिकारी बैठते हैं।
लंबे समय से यही हाल, पहले के आयुक्त भी नहीं बैठते थे
मध्य भारत प्रांत की राजधानी ग्वालियर थी। बाद में मध्य प्रदेश के गठन के समय प्रदेश की राजधानी भोपाल को बनाए जाते समय 1956 में पांच मुख्यालय ग्वालियर को दिए गए थे। यह मुख्यालय आबकारी , परिवहन, राजस्व मंडल, भू अभिलेख, संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा थे। आबकारी मुख्यालय में पहले भी जो आयुक्त रहे उनका भी यही हाल रहा। ग्वालियर नाम का मुख्यालय रहा और अधिकारी भोपाल छोड़ते ही नहीं थे।
वहीं 2022 के उदाहरण की बात करें तो तत्कालीन आबकारी आयुक्त ओपी श्रीवास्तव अधिकतर ग्वालियर में बैठते थे और काम का संचालन यहीं से करते थे। बीच में मुख्यालय को भोपाल शिफ्ट करने की चर्चाएं भी तेज हुईं थीं लेकिन इसके बाद मामला दब गया।
क्यों महत्वपूर्ण है आयुक्त की मौजूदगी
एक वरिष्ठ अफसर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि आबकारी मुख्यालय हो या कोई भी मुख्यालय आयुक्त की मौजूदगी मुख्यालय में महत्वपूर्ण होती है, मुख्यालय में अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों व बाबुओं की पर्याप्त संख्या होती है, इनके अंदर इंस्टीटयूट मेमोरी स्ट्रांग होती है जिसका लाभ अधिकारी को मिलता है,कोई भी पुरानी जानकारी से लेकर अहम फाइल जो तत्काल देखी जा सकती है, अधिकारी अगर मुख्यालय में नहीं रहेंगे तो क्या काम हो सकेगा।