व्यवस्था या मौत का तमाशा? साइन करने के बाद भी पुलिस भूली 'नो एंट्री' का वादा, बैठक के कागजों में दबी रह गईं हिदायतें
शीतला माता मंदिर समिति के साथ हुई इसी महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया था कि छठी, सप्तमी और अष्टमी को शीतला माता मंदिर चीनोर रोड दोनों ओर से वाहनों ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 10:27:25 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 09:23:45 AM (IST)
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद पुलिस बल। नईदुनियाHighLights
- बैठक में तय हुए थे सुरक्षा नियम
- अधिकारियों ने किए थे हस्ताक्षर
- लापरवाही से हुआ बड़ा हादसा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शीतला माता मंदिर पर नौ अक्टूबर को श्रद्धालुओं से लेकर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था व सुविधाओं को लेकर मेला समिति की विस्तृत बैठक का आयोजन किया गया था इसी बैठक में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सहित अन्य विभागों के लोग भी शामिल थे।
तय हुआ था वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
मंदिर समिति के साथ हुई इसी महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया था कि छठी, सप्तमी और अष्टमी को शीतला माता मंदिर चीनोर रोड दोनों ओर से वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रखा जाएगा। यह मंदिर की बैठक की प्रोसिडिंग में 11वें और 13वें नंबर का बिंदु था, इसी तरह अन्य व्यवस्थाओं को लेकर बिंदु तय किए गए थे जब सबकुछ तय कर लिया गया तो अधिकारियों ने अपने अपने साइन किए। इसमें सीएसपी, एसडीएम ,तहसीलदार, थाना प्रभारी सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के हस्ताक्षर हुए थे।
व्यवस्थाओं को बनाने के लिए यह बैठक हुई थी या लोगों की मौत का तमाशा यह सब सामने है। खुद पुलिस अधिकारी के साइन होने के बाद भी मैदान पर व्यवस्था नहीं बनाई और बिना पुलिस चेक प्वाइंट के सब चलने दिया और बड़ा हादसा हो गया।
शीतला माता मंदिर: क्या-क्या तय किया था
मंदिर पर सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम पैनल, मंदिर के बाहर पार्किंग व्यवस्था, लाइट की व्यवस्था, पुलिस-पीडब्ल्यूडी द्वारा बांस बल्ली की व्यवस्था, समिति द्वारा दुकानदारों को किराए की रसीदें जारी करना, रोड किनारे पेड़ों की छटाई, हाईवे से मंदिर तक लाइट के लिए मेला समिति की ओर से जनरेटर, पेयजल-स्वच्छता, ट्रांसफार्मर, भारी वाहन हाईवे तिराहा से चीनोर रोड प्रतिबंधित रहेगा, पुलिस यह व्यवस्था सुनिश्चित कराएगी, छटी, सप्तमी और अष्टमी को दोनों ओर वाहन प्रतिबंधित किए जाएंगे।
बैठक में पुलिस के हस्ताक्षर ही लापरवाही के सबूत
मंदिर समिति की बैठक में ही सब तय कर लिया गया था और अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हुए। तय हुआ था कि पुलिस वाहनों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था तय करेगी लेकिन इसके बाद भी पालन नहीं किया गया और यही हस्ताक्षर व्यवस्था बनाने के नहीं लापरवाही के सबूत बन गए।