ग्वालियर-चंबल में बदला मौसम का मिजाज, रातभर हुई बारिश के बाद सुबह से छाए रहे घने बादल
मौसम विभाग ने ग्वालियर सहित चंबल संभाग के श्योपुर, मुरैना और भिंड में सुबह के समय हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है।
Publish Date: Fri, 30 Oct 2026 09:22:40 AM (IST)Updated Date: Fri, 30 Oct 2026 09:23:07 AM (IST)
गुरुवार की शाम को हुई तेज वर्षा के बीच आकाशवाणी तिराहा से निकलते वाहनl नईदुनियाHighLights
- रातभर में हुई 6.1 मिमी बारिश
- न्यूनतम तापमान में आई जोरदार उछाल
- बेमौसम बरसात से फसलों को नफा-नुकसान
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मौसम में आए बदलाव के चलते ग्वालियर में शुक्रवार सुबह हल्की वर्षा का दौर देखने को मिला। मौसम विभाग ने ग्वालियर सहित चंबल संभाग के श्योपुर, मुरैना और भिंड में सुबह के समय हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है। आसमान में बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में बूंदाबांदी का अलर्ट जारी किया गया है।
गुरुवार की रात हुई 6.1 मिमी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर में रात के दौरान 6.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि कुल वर्षा का आंकड़ा 6.8 मिमी रहा। वर्षा और बादलों के असर से रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। न्यूनतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक है। सुबह साढ़े पांच और साढ़े आठ बजे तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। हवा में नमी बढ़कर 96 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की आशंका
मौसम विभाग ने गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई है। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर फिसलन और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। बिजली आपूर्ति में भी अस्थायी व्यवधान आ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े नहीं होने की सलाह दी है।
वर्षा से गिरा तापमान, लोगों को महसूस हुई ठंडक
वर्षा की वजह से गुरुवार दिन के तापमान में शाम को 7.2 डिसे की गिरावट हुई। यानि दिन का तापमान रात के तापमान के पास पहुंच गया और अंतर 2.5 डिसे का रह गया। ऐसे में मौसम में ठंडक आ गई। जिससे लोगों को ठंडक का एहसास होना शुरू हो गया। साथ ही शाम को जब वर्षा से लोग भीग भी गए। ऐसे लोगों को अधिक ठंड का एहसास हुआ।
बिन मौसम की वर्षा के फायदे व नुकसान
- वर्तमान में अंचल में धान की फसल कट रही है। वर्षा व तेज हवा चलने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन रबी की फसल सरसों, चना सहित अन्य फसलों की बुवाई के लिए मौसम अनुकूल हो गया है।
- यदि मौसम साफ होने के बाद दिन के तापमान में अधिक बढ़ोतरी नहीं होती है तो अंचल में मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी कम हो जाएगा।