50 साल में पहली बार निगम से बाहर गया तिब्बती बाजार, 20 लाख का नुकसान और साख पर भी उठे सवाल
इस साल भी तिब्बती शरणार्थियों ने बाजार लगाने के लिए निगम के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन फूलबाग मैदान में बाजार लगाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं कराई ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 06:16:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 06:17:05 PM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- फूलबाग मैदान में जगह न मिलने से बिगड़ी बात
- लक्ष्मीबाई समाधि के सामने बाजार लगाने पर भी संकट
- 15 दिन की कथा के फेर में 4 माह का बाजार अटका
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम के इतिहास में 50 साल में पहली बार ऐसा मौका आया है, जब हर साल लगने वाले तिब्बती बाजार को इस बार फूलबाग मैदान में जगह नहीं दी गई है। ये तिब्बती शरणार्थी हर साल अक्टूबर से लेकर फरवरी तक चार माह फूलबाग मैदान या निगम की संपत्तियों पर अपना मार्केट लगाते थे और बदले में हर साल निगम को 20 लाख रुपये का राजस्व प्रदान करते थे।
तिब्बती शरणार्थियों ने किया था संपर्क
इस साल भी तिब्बती शरणार्थियों ने बाजार लगाने के लिए निगम के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन फूलबाग मैदान में बाजार लगाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। तीन से चार बार निगम में चक्कर लगाने के बाद भी जब इन शरणार्थियों को जगह उपलब्ध नहीं कराई गई, तो उन्होंने कलेक्टर रुचिका चौहान से संपर्क कर अपनी व्यथा बताई।
प्रशासन ने लक्ष्मीबाई समाधि के पास दिखाया नया स्थान
इसके बाद कलेक्टर ने पहल करते हुए उन्हें सिर्फ पांच लाख रुपये का शुल्क लेकर वीरांगना लक्ष्मीबाई समाधि के सामने खुली भूमि बाजार लगाने के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की है। हालांकि यहां भी बाजार लगने पर संशय की स्थिति है। इसका कारण है कि एडीएम शाखा ने इस मामले में एसडीएम झांसी रोड से रिपोर्ट देने को कहा था। लक्ष्मीबाई समाधि के ठीक सामने चल रहे एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते ट्रैफिक के संचालन और पार्किंग के लिए जगह की कमी को देखते हुए प्राथमिक तौर पर यहां भी बाजार लगने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
अनुमति मिलना आसान नहीं
हालांकि तिब्बत मार्केट एसोसिएशन की ओर से प्रशासन से जगह उपलब्ध कराने के लिए क्लियरेंस मांगा गया है, लेकिन ये अनुमति मिलनी भी मुश्किल नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि फूलबाग मैदान में विधायक डॉ. सतीश सिकरवार द्वारा आयोजित कराई जा रही कथा के चलते निगम ने 20 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान करा लिया। वो भी उस परिस्थिति में जब, निगम के पास वेतन बांटने तक के लिए पैसा मौजूद नहीं है।
अलग जगहें दिखाईं, लेकिन नहीं बनी बात
नगर निगम की राजस्व शाखा ने तिब्बत मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारियों को फूलबाग क्षेत्र में ही कुछ अन्य जगहें दिखाई थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई। उन्होंने चौपाटी के बगल में, बैजाताल की तरफ पार्क के स्थान भी पदाधिकारियों को दिखाए थे, लेकिन वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण बात नहीं बन पाई। पदाधिकारियों की मांग थी कि फूलबाग मैदान में ही एक हिस्सा उन्हें दे दिया जाए, लेकिन यहां निगम की ओर से रुचि नहीं दिखाई गई। इसका नतीजा यह निकला कि पैसों का नुकसान होने के साथ ही निगम को निश्शुल्क फूलबाग मैदान देना पड़ा।
15 दिन की कथा बनाम 4 माह का बाजार
नगर निगम के अधिकारियों ने तिब्बत मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारियों को ये भी समझाने की कोशिश नहीं की कि वे कुछ दिन रुककर बाजार लगा लें। इसका कारण है कि कथा के लिए अधिकतम 15 दिन फूलबाग मैदान घिरा रहेगा, जबकि बाजार चार माह के लिए लगेगा। ऐसे में कुछ दिन रुकने की स्थिति या फिर थोड़ा सा एडजस्टमेंट होने पर बाजार और कथा दोनों हो सकते थे। पिछले दो वर्षों के दौरान भी इसी प्रकार बाजार और कथा के लिए व्यवस्था की गई थी, लेकिन इस साल ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं की गई है।
हमने निगम से फूलबाग मैदान में मार्केट के लिए जगह मांगी थी, क्योंकि हम हर साल वहीं बाजार लगाते हैं। इस बार बड़ी कथा होने के कारण फूलबाग मैदान नहीं मिल सका। हमने प्रशासन से मांग की तो उन्होंने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने मैदान दिखाया है। इसकी क्लियरेंस को लेकर बात चल रही है। - तेनजिन जिगडेल, अध्यक्ष तिब्बत मार्केट एसोसिएशन