
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग और प्रतिबंध के मामलों में ग्वालियर प्रदेश में नंबर वन पर है। नगरीय प्रशासन व विकास संचालनालय भोपाल की हालिया जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में दर्ज 80 ब्लैकलिस्टिंग प्रकरणों में से 25 ग्वालियर संभाग के हैं।
इनमें अकेले नगर निगम ग्वालियर के 19 मामले शामिल हैं। प्रदेशभर में की गई कार्रवाई का अकेला 31.25 प्रतिशत ग्वालियर संभाग में है। नगर निगम ग्वालियर के 19 प्रकरण प्रदेश के कुल मामलों का करीब 24 प्रतिशत हैं।
संभागवार आंकड़ों में इंदौर 12 प्रकरणों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि रीवा और सागर में 10-10, भोपाल में आठ, जबलपुर में छह और उज्जैन में पांच प्रकरण दर्ज हैं। इन मामलों में ठेकेदारों पर टेंडर मिलने के बाद अनुबंध नहीं करने, काम शुरू नहीं करने या अधूरा छोड़ने, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने और गुणवत्ताहीन निर्माण जैसे कारणों से कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट में दिए गए विवरण के मुताबिक प्रदेश में करीब 30 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें टेंडर मिलने या स्वीकृति के बाद ठेकेदारों ने निर्धारित समय-सीमा में अनुबंध निष्पादित नहीं किया। इनमें नगर निगम ग्वालियर और अमृत 2.0 योजना से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए हैं।
अनुबंध नहीं होने से संबंधित कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाने में बाधा आती है और कई मामलों में दोबारा निविदा बुलाने की स्थिति बनती है। इसके अलावा करीब 20 प्रकरणों में ठेकेदारों ने समय पर काम शुरू नहीं किया या काम अधूरा छोड़ दिया। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, क्योंकि निर्माण कार्यों की समय-सीमा का पालन नहीं होने से परियोजनाओं को पूरा करने में देरी की आशंका बनी रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार करीब सात मामलों में निविदा हासिल करने के लिए फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप सामने आए। इनमें अनुभव प्रमाण पत्र, टर्नओवर संबंधी जानकारी और फिक्स्ड डिपाजिट रसीद (FDR) से जुड़े मामले शामिल हैं। ऐसे प्रकरणों में संबंधित फर्मों पर दो से तीन वर्ष तक प्रतिबंध लगाए जाने का उल्लेख है।
पांच मामलों में सीसी रोड, डामरीकरण और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कमी के कारण कार्रवाई की गई। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MPUDC) की पेयजल और जलप्रदाय परियोजनाओं से जुड़े सात प्रकरण भी रिपोर्ट में शामिल बताए गए हैं।
| संभाग का नाम | प्रकरणों की संख्या | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| ग्वालियर संभाग | 25 प्रकरण | 31.25% |
| इंदौर संभाग | 12 प्रकरण | 15.00% |
| रीवा संभाग | 10 प्रकरण | 12.50% |
| सागर संभाग | 10 प्रकरण | 12.50% |
| भोपाल संभाग | 8 प्रकरण | 10.00% |
| जबलपुर संभाग | 6 प्रकरण | 7.50% |
| उज्जैन संभाग | 5 प्रकरण | 6.25% |
| शहडोल व अन्य | 4 प्रकरण | 5.00% |
| कुल योग | 80 प्रकरण | 100% |