कछुआ चाल रेलवे ! 670 किमी के सफर में लगाए 13 दिन, उपभोक्ता आयोग ने ठोका 31,500 का जुर्माना
दो जुलाई 2025 को बुक किया गया सामान 13 दिन बाद 15 जुलाई को ग्वालियर पहुंचा और बार-बार चढ़ाने-उतारने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 09:37:25 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 09:38:00 PM (IST)
HighLights
- खंडवा से ग्वालियर की जगह पहुंचा श्रीगंगानगर और इंदौर
- बार-बार चढ़ाने-उतारने से क्षतिग्रस्त हुआ घरेलू सामान
- उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की सेवा में मानी बड़ी लापरवाही
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। खंडवा से ग्वालियर के लिए बुक घरेलू सामान को रेलवे ने सीधे ग्वालियर पहुंचाने के बजाय श्रीगंगानगर, अंबाला और इंदौर घुमाया। दो जुलाई 2025 को बुक किया गया सामान 13 दिन बाद 15 जुलाई को ग्वालियर पहुंचा और बार-बार चढ़ाने-उतारने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने इसे रेलवे की सेवा में कमी माना है। आयोग ने रेलवे को 30 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 1500 रुपये प्रकरण व्यय देने के आदेश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने 11 सितंबर 2026 को मोहम्मद तसलीम खान की शिकायत पर यह आदेश दिया। परिवादी ने खंडवा से ग्वालियर के लिए डबल बेड, अलमारी सहित सात पार्सल बुक किए थे, इसके लिए रेलवे ने 2959 रुपये शुल्क लिया था।
सामान को ग्वालियर उतारने के बजाय भेज दिया श्रीगंगानगर
आयोग ने रेलवे के दस्तावेजों और परिवादी को मिले संदेशों के आधार पर पाया कि सामान को चार जुलाई को ग्वालियर उतारने के बजाय श्रीगंगानगर भेज दिया गया। वहां से 5 जुलाई को अंबाला कैंट, फिर 12 जुलाई को अंबाला से इंदौर और 14 जुलाई को इंदौर से ग्वालियर के लिए भेजा गया। इस तरह 670 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला सामान 13 दिन में ग्वालियर पहुंचा। रेलवे ने सामान की पैकिंग ठीक नहीं होने और तकनीकी खराबी का तर्क देकर जिम्मेदारी से इनकार किया था।
सामान को बार-बार उतारने-चढ़ाने से क्षति होना स्वाभाविक
आयोग ने कहा कि जब रेलवे ने सामान को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए शुल्क लिया था तो उसका दायित्व था कि सामान को सुरक्षित और उचित समय में ग्वालियर पहुंचाए। सामान को बार-बार उतारने-चढ़ाने से क्षति होना स्वाभाविक है।
आयोग ने 45 दिन में 20 हजार रुपये सामान की क्षति और 10 हजार रुपये देरी व मानसिक परेशानी के लिए देने के निर्देश दिए हैं। समय पर भुगतान नहीं होने पर परिवाद प्रस्तुति की तारीख से वसूली तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।