नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दीपावली पर घर पहुंचने की उत्सुकता इस बार यात्रियों के लिए परेशानी और अतिरिक्त खर्च का कारण बन गई है। दूसरे शहरों में नौकरी और व्यवसाय करने वाले लोग त्योहार मनाने के लिए अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन परिवहन के किसी भी साधन में उन्हें आसानी से जगह नहीं मिल रही।
ट्रेनों में उपलब्ध नहीं हैं आरक्षित सीटें
ट्रेनों में आरक्षित सीटें उपलब्ध नहीं हैं तो बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा है। वहीं, टैक्सी से सफर करने का खर्च सामान्य दिनों की तुलना में चार गुना तक बढ़ गया है। ऐसे में त्योहार पर घर पहुंचने की योजना बनाने वालों को समय के साथ बजट का भी हिसाब लगाना पड़ रहा है।
स्टेशन पर यात्रियों का भारी दबाव
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का दबाव इतना अधिक है कि प्लेटफार्म से लेकर बाहर के परिसर तक भीड़ नजर आ रही है। दिल्ली और झांसी की ओर जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। श्रीधाम, सचखंड, उत्कल, केरला और भोपाल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में जनरल टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्री आरक्षित कोचों में भी चढ़ रहे हैं।
इससे कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को भी अपने कोच तक पहुंचने और सीट पर बैठने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आरपीएफ और जीआरपी के जवान तैनात हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं।
बसों में सीट के लिए भी मारामारी
सड़क मार्ग पर भी यात्रियों की परेशानी कम नहीं है। बस स्टैंड से आसपास के शहरों और कस्बों के लिए रवाना होने वाली बसें पांच से सात मिनट में ही भर जा रही हैं। साधारण बसों में सीट नहीं मिलने पर यात्री गलियारों में खड़े होकर सफर कर रहे हैं। कुछ बसों में छत पर भी सवारियां बैठी दिखाई दे रही हैं। दूसरी ओर सुविधाजनक बसों का किराया भी तीन से चार गुना तक बढ़ा हुआ है।
ऐसे में कम बजट में यात्रा करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। त्योहार पर अपनों के बीच पहुंचने की खुशी अब महंगे सफर और भीड़भाड़ के बीच मुश्किल होती जा रही है।
11 की जगह 43 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंचा किराया
ट्रेन में सीट नहीं मिलने पर टैक्सी से सफर करने का विकल्प भी महंगा पड़ रहा है। सामान्य दिनों में 10 से 11 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से मिलने वाली कैब का किराया बढ़कर करीब 43 रुपये तक पहुंच गया है। यानी यात्रियों को लगभग चार गुना अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।
कंपू निवासी डाक्टर एनएच शर्मा बताते हैं कि दिल्ली से ग्वालियर आने के लिए उन्हें करीब 16 हजार रुपये टैक्सी का किराया देना पड़ा, जबकि सामान्य दिनों में इसी यात्रा के लिए लगभग पांच हजार रुपये खर्च होते थे।
ग्वालियर स्टेशन पर सुरक्षा का पहरा
ट्रेनों में बढ़ती भीड़ के बीच रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) के जवान तैनात किए गए हैं।
त्योहार के दौरान ट्रेनों और स्टेशन परिसर में पटाखे, पेट्रोल, केरोसिन, गैस सिलिंडर और अन्य ज्वलनशील पदार्थ ले जाने वालों की जांच की जा रही है।
सीसीटीवी कैमरों से प्लेटफार्म और स्टेशन परिसर की निगरानी भी की जा रही है। रेलवे ने अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए 57 फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है।