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एमपी में एक ही बच्चे के दो जन्म प्रमाणपत्र... पीड़ित पिता पहुंचे हाई कोर्ट, रिकॉर्ड सुधारने के लिए नगर निगम को अल्टीमेटम

ग्वालियर नगर निगम द्वारा एक ही बच्चे के अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंच ...और पढ़ें

By Vikram Singh TomarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 09:46:47 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 09:46:46 PM (IST)
एमपी में एक ही बच्चे के दो जन्म प्रमाणपत्र... पीड़ित पिता पहुंचे हाई कोर्ट, रिकॉर्ड सुधारने के लिए नगर निगम को अल्टीमेटम
दो जन्म प्रमाणपत्र जारी होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

HighLights

  1. एक ही बच्चे के दो अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्र
  2. नगर निगम की लिपिकीय त्रुटि पर हाई कोर्ट सख्त
  3. नगर निगम को 4 सप्ताह में फैसला करने के निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम द्वारा एक ही बच्चे के अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंच गया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ता के आवेदन पर चार सप्ताह के भीतर विधि के अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।

एक ही बच्चे के जारी हुए दो अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्र

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में बच्चे के पिता ने बताया कि उनके पुत्र की वास्तविक जन्मतिथि 25 जुलाई 2005 है और यही जन्मतिथि उसके सभी शैक्षणिक एवं अन्य अभिलेखों में दर्ज है। लेकिन नगर निगम ने उसी बच्चे के नाम से दो अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए हैं। याचिका के अनुसार पहला जन्म प्रमाणपत्र 1 अगस्त 2005 को पंजीकृत हुआ, जिसमें जन्मतिथि 25 जुलाई 2005 दर्ज है। वहीं दूसरा प्रमाणपत्र 8 जनवरी 2008 को जारी किया गया, जिसमें जन्मतिथि 28 दिसंबर 2004 अंकित है।


याचिकाकर्ता ने रिकॉर्ड में सुधार की लगाई थी गुहार

याचिकाकर्ता का कहना है कि एक ही बच्चे के नाम पर अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो प्रमाणपत्र जारी होना स्पष्ट रूप से लिपिकीय या प्रशासनिक त्रुटि है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह जन्मतिथि बदलवाना नहीं चाहते, बल्कि केवल गलत और डुप्लीकेट प्रविष्टि को हटाकर सही रिकॉर्ड को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि गलत जन्म प्रमाणपत्र का कभी किसी प्रकार का लाभ नहीं लिया गया। पासपोर्ट सहित अन्य आधिकारिक कार्यों के दौरान रिकॉर्ड का मिलान करते समय यह त्रुटि सामने आई, जिसके बाद नगर निगम को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

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हाई कोर्ट ने दिए नगर निगम को कड़े निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना नगर निगम के संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के लंबित आवेदन पर प्रमाणित प्रति प्राप्त होने से चार सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। इसी निर्देश के साथ कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।