बेमौसम बारिश से ग्वालियर-चंबल में धान की पकी फसल पर संकट, एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित
अभी तक महज 15 प्रतिशत फसल ही खेतों से किसानों के घर तक पहुंच पाई है।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 02:55:39 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 02:56:32 PM (IST)
HighLights
- देरी से कटाई के बीच बारिश ने बढ़ाई चिंता
- फसल के भीगने और चमक खराब होने का अंदेशा
- कृषि विशेषज्ञों की किसानों को तुरंत फसल बचाने की सलाह
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बेमौसम वर्षा ने अंचल के किसानों की नींद उड़ा दी है। वर्षा के साथ तेज हवा के कारण ग्वालियर-चंबल संभाग में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कटने का इंतजार कर रही धान की पकी फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। चूंकि इस बार जिले में धान की रोपाई देरी से हुई थी। इसलिए कटाई भी देरी से हो रही है। अभी तक महज 15 प्रतिशत फसल ही खेतों से किसानों के घर तक पहुंच पाई है।
देरी से कटाई और पिछले साल की यादों से बढ़ी चिंता
वर्तमान में अंचल के अधिकांश खेतों में धान की कटाई का दौर जारी है। किसानों का कहना है कि ठीक यही स्थिति पिछले साल भी बनी थी, जब कटाई के ठीक मुहाने पर वर्षा ने उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया था। वर्षा से खेत में खड़ी या काटकर रखी गई फसल के भीगने से दानों के काले पड़ने और चमक खराब होने का अंदेशा है।
फसल बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह के मुताबिक जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है और फसल खेतों में फैली हुई है, वे तुरंत उसे सुरक्षित स्थानों, खलिहानों या ढंकी हुई जगहों पर सुरक्षित लाएं। कटी हुई फसल को मजबूत तिरपाल से अच्छी तरह ढंक दें ताकि वर्षा का पानी सीधा फसल पर न पड़े। वर्षा से यदि धान के खेतों में पानी भर गया है, तो पानी को बाहर निकालें।