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अचलेश्वर न्यास चुनाव: 8 में से 7 पदों पर वैश्य समाज का कब्जा, कार्यकारी न्यासी पद ब्राह्मण समाज के खाते में

चुनाव की घोषणा के साथ ही चर्चा थी कि राजनीति की तरह मंदिर के चुनाव में भी सामाजिक समीकरण हावी रहेंगे। वर्ष 2017 की सदस्यता सूची के अनुसार, संख्या बल क...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 10:38:00 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 10:39:00 PM (IST)
अचलेश्वर न्यास चुनाव: 8 में से 7 पदों पर वैश्य समाज का कब्जा, कार्यकारी न्यासी पद ब्राह्मण समाज के खाते में
अचलेश्वर न्यास के चुनाव में विजयी प्रत्याशी। नईदुनिया

HighLights

  1. वैश्य समाज के हाथ में न्यास की कमान
  2. महेश मुदगल बने इकलौते कार्यकारी न्यासी
  3. कार्यकारिणी सदस्यों के लिए मतगणना का इंतजा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अचलेश्वर महादेव न्यास के नौ वर्ष बाद हुए चुनाव में एक बार फिर वैश्य समाज ने एकजुटता के साथ मतदान कर अपना वर्चस्व स्थापित किया है। न्यास के आठ पदों के लिए हुए चुनाव में सात पदों पर वैश्य समाज के उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। वहीं कार्यकारी न्यासी के पद पर महेश मुदगल के रूप में ब्राह्मण समाज अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहा है।

अध्यक्ष को कार्यकारी न्यासी की तुलना में केवल 23 वोट अधिक मिले

अध्यक्ष और कार्यकारी न्यासी के पद को लेकर दोनों समाजों के प्रमुख लोगों के बीच आंतरिक रूप से पैक्ट होने की चुनाव के बाद चर्चा का प्रमुख बिंदु बना हुआ है। इन दोनों पदों पर निर्वाचित उम्मीदवारों को मिले मतों में भी मामूली अंतर रहा। अध्यक्ष को कार्यकारी न्यासी की तुलना में केवल 23 वोट अधिक मिले। इससे दोनों पदों पर मतदान के रुझान में समानता की चर्चा को बल मिला है।


चर्चा थी कि राजनीति की तरह मंदिर के चुनाव में भी सामाजिक समीकरण हावी रहेंगे

चुनाव की घोषणा के साथ ही चर्चा थी कि राजनीति की तरह मंदिर के चुनाव में भी सामाजिक समीकरण हावी रहेंगे। वर्ष 2017 की सदस्यता सूची के अनुसार, संख्या बल के आधार पर वैश्य समाज पहले, ब्राह्मण समाज दूसरे और क्षत्रिय समाज तीसरे स्थान पर था। अब नवनिर्वाचित न्यास के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की खोई प्रतिष्ठा बहाल कर श्रद्धालुओं का विश्वास जीतने की है। इसके साथ ही न्यास के संविधान की विसंगतियों को दूर कर सर्वसम्मति से स्पष्ट और व्यावहारिक संविधान तैयार करना भी जरूरी होगा।

2017 के चुनाव के बाद बिगड़े थे समीकरण

इससे पहले न्यास के चुनाव वर्ष 2017 में हुए थे। उस चुनाव में अध्यक्ष पद पर हरिदास अग्रवाल और कार्यकारी न्यासी के पद पर नरेंद्र सिंघल निर्वाचित हुए थे। एक वर्ष के भीतर ही न्यास में विरोध के स्वर उठने लगे थे। सबसे पहले कार्यकारी न्यासी ने इस्तीफा दिया। इसके बाद न्यायालय ने न्यास को भंग कर दिया और पहले रिसीवर नियुक्त किया। बाद में मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंप दी गई। जिलाधीश ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एनके मोदी की अध्यक्षता में प्रशासनिक, नगर निगम और पुलिस अधिकारियों की संचालन समिति गठित की।

समिति ने मंदिर के अधूरे निर्माण को पूरा कराने के बाद उसका लोकार्पण कराया। इसके अलावा गर्भगृह में नई चांदी की जलहरी लगवाई गई और चार खंभों में से तीन पर चांदी मढ़वाने का कार्य कराया गया। जनसहयोग से श्रीरामजानकी मंदिर में हॉल और आधुनिक रसोई का निर्माण कराने के साथ सार्वजनिक प्याऊ भी बनवाई गई।

न्यास की खोई प्रतिष्ठा कैसे लौटेगी?

नवनिर्वाचित न्यास के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनियमितताओं के आरोपों के कारण प्रभावित हुई प्रतिष्ठा को बहाल करना और श्रद्धालुओं का विश्वास जीतना है। इसके लिए न्यास के कामकाज में पारदर्शिता लानी होगी। मंदिर की आय और व्यय का नियमित ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। नए कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने के लिए साधारण सभा की बैठक बुलाकर सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था भी जरूरी है। इसके साथ ही शहर के प्रबुद्धजनों की मार्गदर्शन समिति गठित की जा सकती है, जो न्यास को कार्यों की प्राथमिकता और मंदिर के विकास के संबंध में सुझाव दे।

उत्सवों में सभी के साथ समभाव जरूरी

अचलेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक उत्सवों में सभी श्रद्धालुओं के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना होगा। मंदिर की व्यवस्थाओं को अतिविशिष्ट लोगों तक सीमित रखने के बजाय श्रद्धालु-केंद्रित बनाना जरूरी है। पदाधिकारियों को भी छोटे-छोटे व्यक्तिगत लाभों से बचते हुए मंदिर की गरिमा और जनभावनाओं को प्राथमिकता देनी होगी।

अचलेश्वर लोक की परिकल्पना को साकार करने की चुनौती

मंदिर संचालन समिति ने सरकार और जनसहयोग से अचलेश्वर लोक के निर्माण की परिकल्पना को प्रारूप के रूप में तैयार किया था। अब नवनिर्वाचित न्यास के सामने इस योजना को धरातल पर उतारने की चुनौती होगी। मंदिर परिसर में पार्किंग सहित अन्य व्यवस्थागत समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता से करना होगा। इसके साथ ही न्यास में नए सदस्यों को जोड़ने और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

इन पदाधिकारियों के हाथों में न्यास की कमान

न्यास के आठ पदों की जिम्मेदारी कार्यकारी न्यासी महेश मुदगल, अध्यक्ष राजेश ऐरन, उपाध्यक्ष नवीन गर्ग, सचिव राजकुमार माहेश्वरी, कोषाध्यक्ष कृष्ण बिहारी गोयल, सूचना सचिव निशांति सिंघल, व्यवस्थापक सचिव रामकुमार गोयल और उप व्यवस्थापक सचिव प्रदीप बंसल को सौंपी गई है। मंदिर के सुचारु संचालन के लिए सभी पदाधिकारियों के बीच कार्यविभाजन जरूरी होगा, ताकि प्रत्येक की जिम्मेदारी और मंदिर संचालन में उसकी भूमिका स्पष्ट हो सके।

कार्यकारिणी के लिए एक सप्ताह का इंतजार

आठ पदाधिकारियों के साथ 10 कार्यकारिणी सदस्यों के चयन के लिए भी मतदान हुआ है। इन 10 पदों के लिए 18 उम्मीदवार मैदान में हैं। फिलहाल कार्यकारिणी सदस्यों के मतों की गिनती शेष है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय द्विवेदी के अनुसार, सरकारी अवकाश के दिन इस सप्ताह मतगणना कराई जाएगी। इसके लिए शनिवार या रविवार का दिन संभावित है। मतगणना के बाद कार्यकारिणी के सदस्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।