• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • ग्वालियर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु अविनाश तिवारी को हटाकर कार्यपरिषद भी भंग, धारा 52 लागू

Jiwaji University: मामला ईओडब्ल्यू तक भी पहुंचा और 13 जनवरी 2025 को जेयू कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी सहित 16 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम में एफआइ...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 18 Feb 2025 08:00:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Feb 2025 08:38:23 PM (IST)
जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु अविनाश तिवारी को हटाकर कार्यपरिषद भी भंग, धारा 52 लागू
कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी को पद से हटाया गया।

HighLights

  1. पिछले माह ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज हुई थी।
  2. एक माह बाद राजभवन से बड़ी कार्रवाई की गई।
  3. रीवा के पूर्व कुलगुरु आचार्य को सौंपा गया है प्रभार।

नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। भ्रष्टाचार के आरोपों में लगातार विवादों में घिरे कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी को पद से हटाते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर दी गई है। समस्त कार्यपरिषद को भी भंग कर दिया गया है। आगामी आदेश तक कुलगुरु पद की जिम्मेदारी अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के पूर्व कुलगुरु राजकुमार आचार्य को सौंप दी गई है, जो वर्तमान में महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, करैली जिला नरसिंहपुर के प्राचार्य के पद पर काम कर रहे हैं। राज्यपाल और कुलाधिपति द्वारा मंगलवार को जारी इस आदेश से अब जीवाजी विश्वविद्यालय की संपूर्ण कमान और शक्तियां डा. आचार्य के हाथों में आ गई हैं।

naidunia_image

  • दरअसल यह पूरा विवाद फर्जी दस्तावेज के आधार पर मुरैना की सबलगढ़ तहसील के झुंडपुरा गांव में 14 साल से शिवशक्ति कॉलेज को संबद्धता दिए जाने और कालेज में छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप के साथ शुरू हुआ था।
  • मामले में बीते एक वर्ष से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मुरार में रहने वाले अरुण शर्मा ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा था कि जेयू से सांठगांठ कर उसके दस्तावेज शिवशक्ति कालेज के प्राचार्य के नाम पर उपयोग किए हैं। वहीं शिवशक्ति कालेज शुरुआत से ही सिर्फ दस्तावेज में ही चल रहा है।