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10 साल से थी कमजोरी, 40 की उम्र में पहचानी, जेएएच ग्वालियर में मिली दुर्लभ 'मोयामोया' बीमारी

यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से संबंधित एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की प्रमुख रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण बार-बार स्ट...और पढ़ें

By Varun SharmaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 08:35:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:37:33 PM (IST)
10 साल से थी कमजोरी, 40 की उम्र में पहचानी, जेएएच ग्वालियर में मिली दुर्लभ 'मोयामोया' बीमारी
प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी है दुर्लभ बीमारी
  2. गंभीर हालत के बाद वेंटिलेटर से सुरक्षित बाहर आया मरीज
  3. बिना सर्जरी दवाओं से तीन डॉक्टरों ने किया सफल इलाज

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिवपुरी निवासी 40 वर्षीय अमित पिछले करीब तीन दशकों से रुक-रुक कर होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे थे। मात्र 10 वर्ष की उम्र में उन्हें पहली बार शरीर के दाहिने हिस्से में अचानक कमजोरी (राइट हेमिपेरेसिस) की समस्या हुई थी। इसके एक वर्ष बाद 11 वर्ष की उम्र में दोबारा इसी प्रकार की समस्या सामने आई।

इसके बाद हाल ही में अचानक बेहोशी की स्थिति उत्पन्न होने पर परिजन उन्हें उपचार के लिए जेएएच न्यूरोलाजी अस्पताल, ग्वालियर लेकर पहुंचे। अस्पताल में मरीज की विस्तृत न्यूरोलॉजिकल जांच व आवश्यक परीक्षण किए गए। जांच के दौरान मरीज में 'मोयामोया' डिजीज की पहचान हुई।


एक दुर्लभ बीमारी है

यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से संबंधित एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की प्रमुख रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण बार-बार स्ट्रोक, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बेहोशी या अन्य न्यूरोलाजिकल लक्षण हो सकते हैं।


मरीज की स्थिति अति गंभीर होने के कारणवश जीवन रक्षा के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया, जिसे कुशल उपचार होने के फलस्वरूप वेंटिलेटर से मरीज को निकाल पाने में सफलता मिली।

मरीज को सर्जरी का भी परामर्श दिया गया जिसके लिए परिवारजन की तरफ से मना कर दिया गया।

तीन डॉक्टरों की देखरेख में हो रहा है इलाज

अतः मरीज का बिना सर्जरी के दवाओं द्वारा ही सफल उपचार किया गया। मरीज का उपचार डा. प्रो. दिनेश उदैनिया, डॉ. अरविंद गुप्ता एवं डॉ. सौरभ सिंह राजपूत की देखरेख में किया गया। चिकित्सकों एवं मेडिकल टीम द्वारा मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक उपचार प्रदान किया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर है।