पति की लात-घूंसों से हत्या करने वाली पत्नी को उम्रकैद... पेट पर प्रहार से आंत में हुए थे दो छेद
चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह जमरा की अदालत ने मामले में पत्नी प्रीति उर्फ प्रतिभा सिसौदिया को हत्या का दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 09:59:02 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 09:59:47 PM (IST)
HighLights
- पेट पर प्रहार से आंत में हुए दो छेद
- घर में अकेले मौजूद थे पति-पत्नी
- अदालत ने माना हत्या का दोषी
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पति के पेट में लात-घूंसों से मारपीट करने से उसकी छोटी आंत में दो जगह छेद हो गए और बाद में उसकी मौत हो गई। चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह जमरा की अदालत ने मामले में पत्नी प्रीति उर्फ प्रतिभा सिसौदिया को हत्या का दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इस मामले में शासन का पक्ष अपर लोक अभियोजक कुलदीप दुबे ने रखा।
मामला अप्रैल 2021 का है। अभियोजन के अनुसार 10 अप्रैल को बलराम उर्फ बल्लू की तबीयत खराब होने की सूचना पर स्वजन उसे अस्पताल ले गए थे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि मृतक की पत्नी प्रीति ने उसके साथ मारपीट की थी। बाद में पुलिस ने उसके विरुद्ध हत्या का प्रकरण दर्ज किया।
शरीर पर मिलीं 8 चोटें
मृतक का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने अदालत को बताया कि उसके शरीर पर आठ चोटें थीं। पेट की छोटी आंत में दो जगह छेद मिले थे। चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार इन चोटों के कारण हृदय और श्वसन तंत्र ने काम करना बंद कर दिया और उसकी मृत्यु हुई।
क्यूरी रिपोर्ट में भी पेट की चोटों को छोटी आंत में हुए छेद से संबंधित बताते हुए उन्हें मृत्यु के लिए पर्याप्त माना गया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मृतक शराब के नशे में था और गिरने से उसे चोटें आई थीं। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि घटनास्थल की जांच में छत पर ऐसी कोई भौंतरी वस्तु नहीं मिली, जिस पर गिरने से इस तरह की चोटें आने की संभावना हो।
घर में पति-पत्नी के अलावा कोई नहीं था
अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय घर में मृतक और उसकी पत्नी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नहीं था। गवाहों ने घटना से पहले प्रीति द्वारा बलराम के साथ मारपीट किए जाने की बात बताई थी। अदालत के अनुसार मृतक के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और अभियुक्त को यह स्पष्ट करना था कि ये चोटें कैसे आईं, लेकिन वह इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकी।
न्यायालय ने इन परिस्थितियों को एक-दूसरे से जुड़ी ऐसी साक्ष्य-श्रृंखला माना, जो अभियुक्त की ओर ही निश्चायक रूप से संकेत करती है।
अदालत ने प्रीति को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही, मामले में उसकी पूर्व आपराधिक दोषसिद्धि नहीं होने और सुधार की संभावना को देखते हुए मृत्युदंड नहीं दिया गया।