नर्मदापुरम (होशंगाबाद) नवदुनिया प्रतिनिधि
रविशंकर नगर में चल रही श्रीमद देवी भागवत कथा के पंचम दिवस आचार्य पं राजेश शास्त्री प्रवचन का अमृत पान कराते हुए श्रद्धालुओं से कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। असुरी शक्ति के बढ़ने का ही मतलब अब भगवान के अवतार लेने का समय आ गया है। पं शास्त्री ने देवी सरस्वती की महिमा का बखान करते हुए श्रीराम जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि देवी सरस्वती के कारण ही रावण जैसे असुर का वध हो पाया। माता कैकई और उनकी दासी मंथरा की जीवा पर मां सरस्वती विराजमान हुई और उन्होंने भगवान राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। आचार्य शास्त्री ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि राजा दशरथ के यहां भगवान का राम सहित भरत, लक्ष्मण, शत्रुघन का जन्म हुआ। चहुंओर खुशी का वातावरण बन गया। गुरू वशिष्ठ ने उनका विवाह राजा जनक की पुत्री सीता से कराकर अयोध्या वापस आ रहे थे। यह देख देवताओं में चिंता उत्पन्ना हो गई कि भगवान का जन्म इसलिए नहीं हुआ था अब तो कुछ करना होगा। सभी देवतागण माता सरस्वती के पास गए और कहा कि अब आप ही काम बना सकती हैं। मां सरस्वती पहले दासी मंथरा और फिर माता कैकई की जीवा पर विराजमान होती हैं और राजा दशरथ से भगवान राम के लिए 14 वर्ष वनवास मांगती हैं। पिता दशरथ के वचन की मर्यादा रखते हुए भगवान राम वनवास चले जाते हैं और उसके बाद माता सीता का हरण होता है। फिर युद्ध के बाद खूंखार राक्षस रावण का मयवंश के साथ अंत होता है। आज की कथा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन के विवाह की झांकी सजाई। दरबार की आरती कालोनाइजर देवदत्त तिवारी सहित पं लक्ष्मण किशोर शास्त्री, यजमान दीपक यादव, बद्रीप्रसाद कौरव, ब्रजेश विश्वकर्मा, ब्रिजेंद्र मालवीय, कार्तिक विश्वकर्मा, दिनेश जाटव ने की। उन्होंने श्रद्धालुगणों से मास्क लगाकर तथा शारीरिक दूरी का पालन करने की अपील की है।