
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। "भिक्षा नहीं, शिक्षा लो" के संदेश को धरातल पर उतारते हुए इंदौर में 40 बच्चों को स्कूल में सीधा प्रवेश दिलाया गया। जिला प्रशासन की अनूठी पहल के तहत शहर में भिक्षावृत्ति करने वाले परिवारों के बच्चों को स्कूल की राह मिली है, ये बच्चे इससे पहले कभी विद्यालय नहीं जा पाए थे। स्कूल से दूर रहने के कारण गलत आदतों में जाने का अंदेशा था, इसलिए प्रशासन ने सभी को स्कूल में प्रवेश दिलाया। इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत भिक्षुकों का रेस्क्यू कर पुनर्वास किया जा रहा है। साथ ही भिक्षावृत्ति करने वाले परिवारों के बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया जा रहा है।
इसी तरह की पहल के तहत चंदन नगर क्षेत्र की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 40 बच्चों को सुदामा नगर स्थित अत्री देवी प्राथमिक शाला में प्रवेश दिलाया गया है। मंगलवार को ये सभी बच्चे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। यहां पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बच्चों को चॉकलेट वितरण करने के साथ ही बच्चों को सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान लगातार जारी रहेगा। वहीं बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने की पहल भी जारी रहेगी, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
बच्चों के पास नहीं थे दस्तावेज। रेस्क्यू के बाद भिक्षुकों की काउंसलिंग में सामने आया कि उनके बच्चे भी स्कूल नहीं जाते हैं। बच्चों के पास किसी तरह के दस्तावेज नहीं हैं। दस्तावेजों के अभाव, बाल श्रम और भिक्षावृत्ति के कारण ये बच्चे स्कूल से दूर थे। जिला प्रशासन ने इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल में प्रवेश दिलाया। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा बच्चों के यूनिफॉर्म, स्कूल बैग और पुस्तकों की व्यवस्था कराई गई।
पहले 172 बच्चों को दिलाया प्रवेश। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान 1600 से अधिक भिक्षुकों का रेस्क्यू किया गया है। भिक्षावृत्ति अभियान के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा का कहना है कि पहले भी अहीर खेड़ी, रोबोट स्क्वेयर, पिपलिहाना और कांकड़ क्षेत्रों के 172 बच्चों को भी स्कूल में प्रवेश दिलाया जा चुका है।