
नीरज व्यास, इंदौर। शहर के मध्य क्षेत्र में शुरू हुआ एमटीएच महिला अस्पताल करोड़ों की लागत से तैयार किया गया है। यहां हर महीने लगभग 1500 डिलीवरी की जाती हैं, यह 450 बिस्तरों की क्षमता वाला अस्पताल है, लेकिन यहां डिलीवरी केस के पूर्व महिलाओं की सामान्य जरूरी जांच के लिए मेडिसिन और सर्जरी विभाग की ओपीडी ही नहीं लगती है। यही वजह है कि यहां आने वाली गर्भवतियों को एमवाय रैफर करना पड़ता है।
यहां एक दिन में 25 सीजेरियन तक हो जाते हैं, लेकिन आईसीयू में कोई स्पेशलिस्ट की नियुक्ति ही नहीं हुई है। पांच मंजिला इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी विंग और सोनोग्राफी जांच की व्यवस्था की गई है। पहली मंजिल पर लेबर रुम और एएनसी वार्ड हैं। वहीं दूसरी मंजिल पर आईसीयू और ओटी हैं। अस्पताल की लिफ्ट ज्यादातर समय बंद रहती है, ऐसे में मरीजों के परिजनों को लाने ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में मरीजों के परिजनों का भारी दवाब रहता है। एक मरीज के साथ कई बार बहुत सारे अटेंडेंट आ जाते हैं। ऐसे में व्यवस्थाएं चरमराने लगती हैं। लोगों की कर्मचारियों से कई बार हुज्जत हो जाती है। ऐसे में लोगोें ने सीएम हेल्पलाइन पर अस्पताल से जुड़ी 250 से ज्यादा शिकायत की हैं। अस्पताल के डाक्टर भी मरीजों के परिजनों से होने वाली बहस को स्वीकारते हैं और इस समस्या का निकाल चाहते हैं।
इस 450 बेड के अस्पताल में फिलहाल 72 रेसिडेंट डाक्टर और 27 कंसलटेंट सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और तृतीय और चतुर्थ स्टाफ की काफी कमी है। यहां फिलहाल 3 सोनोग्राफी मशीनें संचालित हो रही हैं, लेकिन अस्पताल प्रभारी के अनुसार लोड को देखते हुए दो और सोनोग्राफी मशीनों की जरूरत है। अस्पताल द्वारा टारगेट सोनोग्राफी मशीन की मांग भी की गई है।
यहां पर जिला अस्पताल और पीसी सेठी अस्पताल से भी केस रैफर कर दिए जाते हैं, इससे वर्क लोड बढ़ जाता है। हमने टारगेटेड सोनोग्राफी मशीन की जरूरत भी बताई है। आने वाले दिनों में अस्पताल में सुविधाएं और बढ़ाई जाएंगी। अनुपमा दवे, प्रभारी, एमटीएच महिला अस्पताल